चंडीगढ़ , मई 16 -- शिरोमणि अकाली दल ने मजीठा नगर काउंसिल चुनाव के लिए उसके उम्मीदवारों को न्याय दिये जाने की प्रदेश चुनाव आयोग से मांग की है कि जाए।

पार्टी के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को प्रदेश चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि लगातार चार दिनों तक पार्टी के किसी भी उम्मीदवार को आगामी नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए जरूरी एनओसी जारी नहीं की गई।

श्री मजीठिया ने कहा कि इसके बाद सभी अकाली उम्मीदवारों ने हलफनामे के साथ अपने नामांकन पत्र दाखिल किए, जिनमें यह घोषित किया गया कि उन्होंने सभी बकाया राशि जमा कर दी है और उनके दस्तावेज पूरे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर घुम्मण चुनाव प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब यह दबाव बनाया जा रहा है कि आधे अकाली उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कर दिए जाएं, ताकि अकाली दल नगर परिषद में अपना अध्यक्ष न बना सके। उन्होंने चुनाव आयोग से मामले में हस्तक्षेप करने और अकाली उम्मीदवारों के नामांकन को गैरजरूरी कारणों से खारिज न करने की अपील की।

श्री मजीठिया ने मजीठा के ईओ रामनदीप वरैच के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 में लुधियाना सेंट्रल उपचुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने वरैच को फटकार लगाई थी और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, बावजूद इसके उन्हें मजीठा में ईओ की जिम्मेदारी दे दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि 14 मई को ईओ अपने कार्यालय से चले गए थे और 15 मई को एसडीएम, जो चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी भी हैं, द्वारा विशेष समय पर एनओसी जारी करने के निर्देश देने के बावजूद ईओ कार्यालय नहीं पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि ईओ ने स्वयं रिटर्निंग अधिकारी के सामने स्वीकार किया कि उन पर आम आदमी पार्टी सरकार की ओर से एनओसी जारी न करने का दबाव था।

पत्रकारों से बातचीत में श्री मजीठिया ने कहा कि कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने 16 अप्रैल को सीबीआई छापे से एक दिन पहले उद्योग, बिजली और स्थानीय निकाय विभाग से जुड़े कर्मचारियों को सुबह पांच बजे कार्यालय बुलाया था, जिसके बाद कथित तौर पर भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलें नष्ट की गईं। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए। उन्होंने मुख्य सचिव केएपी सिन्हा पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार और निजी डेवलपर्स को सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराने के लिए चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) की अनुमति दी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स पर की जाने वाली नकारात्मक टिप्पणियों को हटाने के लिए 10.59 करोड़ रुपये में एक निजी एजेंसी नियुक्त की है।

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