मुंबई , अप्रैल 02 -- एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के हाल ही में आयोजित रात्रिभोज (डिनर) में उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों, नागेश आष्टीकर और संजय देशमुख की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज कर दी हैं।

कयास लगाये जा रहे हैं कि क्या वे 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए शिवसेना सांसद नागेश आष्टीकर ने आज मीडियाकर्मियों से कहा, "शिंदे गुट के सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक वर्षगांठ कार्यक्रम आयोजित किया था। उन्होंने हमसे इसमें शामिल होने का अनुरोध किया था, इसलिए मैं उन्हें बधाई देने उनके घर गया था। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हमारे बीच कुछ और चर्चा हुई। 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर बातें हो रही हैं, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मेरा मानना है कि हमें एक-दूसरे के सुख-दुख में मिलना चाहिए। इस मुलाकात में कुछ भी गलत नहीं है।"यह घटनाक्रम उन खबरों के बाद सामने आया है, जिनमें कहा गया था कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हाल ही में 'ऑपरेशन टाइगर' के लिए हरी झंडी लेने दिल्ली गये थे। रिपोर्टों में यह भी बताया गया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिंदे से मुलाकात नहीं की और फिलहाल 'ऑपरेशन टाइगर' पर रोक लगा दी है।

सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री शिंदे शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के छह सांसदों और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के छह अन्य सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल कराने के इच्छुक थे।

सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में शिंदे की शिवसेना के पास सात सांसद हैं। अगर शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के छह सांसद और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के छह सांसद पाला बदलकर श्री शिंदे की पार्टी में शामिल हो जाते हैं तो श्री शिंदे के पास कुल 19 सांसद हो जायेंगे। इससे उनकी राजनीतिक सौदेबाजी की ताकत बढ़ जायेगी। गणना यह है कि इससे श्री शिंदे 2029 के लोकसभा चुनावों के दौरान कम से कम 19 सीटों पर अपना दावा ठोक सकेंगे।

मौजूदा स्थिति में श्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नौ सांसद लोकसभा के सदस्य हैं।

ऐसी अटकलें थीं कि उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद इसलिए नाखुश हैं, क्योंकि उन्हें भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार से अपने चुनाव क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए फंड मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, उन्हें लगता है कि यदि वे श्री शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का हिस्सा बन जाते हैं, तो फंड प्राप्त करना आसान हो जायेगा।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के इन छह सांसदों के बारे में कहा जा रहा है कि उनका मानना है कि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन सरकार होना फायदेमंद रहेगा।

ऐसी अटकलों के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे 'डैमेज कंट्रोल' की मुद्रा में आ गये और उन्होंने 22 मार्च को अपने 'मातोश्री' निवास पर अपनी पार्टी के सांसदों की बैठक बुलायी थी। इस बैठक में सांसदों की नाराजगी पर चर्चा की गयी थी।

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