गांधीनगर , जनवरी 13 -- केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गुजरात के पहले अत्याधुनिक बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी 'बायो-सेफ्टी लेवल-4' लैब तथा 'एनिमल बायो-सेफ्टी लेवल' सुविधा का यहां मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में शिलान्यास किया। समारोह के दौरान गुजरात बायो-टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर की 'बायो-सेफ्टी लेवल-4' सुविधा को भारत सरकार की 'बायोई3 नीति' अंतर्गत 'नेशनल सेंटर फॉर हाई कंटेनमेंट पैथोजन रिसर्च फैसिलिटी' के रूप में नियुक्त करने के लिए केन्द्रीय जैव- प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को आशय पत्र (एलओआई) प्रदान किया गया।
श्री शाह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गुजरात की धरती से भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा तथा बायो-सेफ्टी क्षेत्र के विकास के नए युग की शुरुआत हुई है। पुणे के बाद देश का यह केवल दूसरा उच्च स्तरीय लैब है, लेकिन राज्य सरकार की विशेष पहल से 362 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाला यह देश का पहला बीएसएल-4 लैब बनेगा। भविष्य में यह लैब जानलेवा वायरसों से लड़ने के लिए भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच तथा जैव-सुविधाओं का मजबूत किला सिद्ध होगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी राष्ट्र के विकास का आधार स्तंभ होना चाहिए' विजन को दोहराते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का यह लैब शोधकर्ताओं तथा युवाओं के लिए अनेक अवसरों के द्वार खोलेगा। विशेषकर पशुओं से इंसानों मं फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए उनके द्वारा शुरू किए गए 'वन हेल्थ मिशन' को इस लैब से गति मिलेगी। हाल ही में गुजरात द्वारा झेले गए चांदीपुरा तथा लम्पी स्किन डिसीज जैसे संकटों के विरुद्ध इस प्रकार की रिसर्च आधारित स्थायी सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य थी।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने भारत के बायो-टेक्नोलॉजी क्षेत्र में आए क्रांतिकारी परिवर्तन के आँकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्ष में बायो-टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्ष 2014 में भारत की बायो-इकोनॉमी, जो 10 बिलियन डॉलर थी, वर्ष 2024 तक बढ़कर 166 बिलियन डॉलर के पार पहुँची है। अनुसंधान को आविष्कार की आत्मा मानते हुए केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली ढाँचागत सुविधाओं के कारण आज भारत के वैज्ञानिक अत्यंत सुरक्षित वातावरण में विश्व स्तरीय शोध-अनुसंधान कर रहे हैं।
श्री शाह ने स्टार्टअप तथा निवेश क्षेत्र में हुई वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 2014 में इस क्षेत्र में 500 से भी कम स्टार्टअप थे, जो आज 10,000 से अधिक हुए हैं। इसी प्रकार; इनक्यूबेटर्स की संख्या छह से बढ़कर 95 और इनक्यूबेशन स्पेस 60 हजार स्क्वायर फीट से बढ़कर नौ लाख स्क्वायर फीट हुआ है। उल्लेखनीय रूप से प्राइवेट इन्वेस्टमेंट फंड 10 करोड़ रुपए से बढ़कर 7000 करोड़ रुपए तक पहुँचा है और पेटेंट फाइलिंग की संख्या भी 125 से बढ़कर 1300 को पार कर गई है, जो दर्शाता है कि भारत के युवा अब 'जॉब सीकर' नहीं, बल्कि 'जॉब गिवर' बने हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार की 'बायोई3 नीति' अंतर्गत देश को बायो-टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अधिक ऊँचाई पर ले जाने का संकल्प है। भारत आज कोरोना तथा सर्वाइकल कैंसर जैसे गंभीर रोगों की वैक्सीन का स्वदेशी निर्माण कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों तथा अनुसंधानकर्ताओं का आह्वान किया कि भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है। यह लैब आगामी समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम बनेगा।
श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आज 'विज्ञान' तथा 'विरासत'; दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। कोरोना काल में भारतीय वैज्ञानिकों ने अल्प समय में वैक्सीन बनाकर 140 करोड़ नागरिकों को सुरक्षित करते हुए विश्व की सहायता की है, जिसकी नींव में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को राष्ट्र के विकास का आधार स्तंभ बनाने का दृष्टिकोण रहा है। इस लैब द्वारा भारतीय वैज्ञानिकों को अब सैंपल टेस्टिंग के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को सिद्ध करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2027 तक सेमीकंडक्टर तथा बायो-टेक्नोलॉजी क्षेत्र में भी भारत विश्व स्तर पर प्रथम पंक्ति में होगा।
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