हैदराबाद , नवंबर 02 -- तेलंगाना के परिवहन और बीसी कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यह कहते हुए आलोचना की कि राज्य के बंटवारे के समय राज्य से किये गये वादों पर बात करने के बजाय श्री शाह ने अपनी हैदराबाद यात्रा को केवल कांग्रेस पर हमला करने तक ही सीमित रखा।

एक वीडियो बयान में, श्री पोन्नम ने सवाल उठाया कि श्री शाह ने तेलंगाना के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धताओं के बारे में क्यों नहीं बताया और उन्होंने राज्य द्वारा दिये गये फंड तथा केंद्र द्वारा दी गयी सहायता का हिसाब मांगा।

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण पर श्री पोन्नम ने कहा कि कांग्रेस अयोग्य मतदाताओं को हटाने के खिलाफ नहीं है लेकिन उसे वास्तविक मतदाताओं खासकर एससी,एसटी,बीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के नाम हटाए जाने की आशंका को लेकर चिंता है। उन्होंने श्री शाह को चुनौती दी कि वह मतदाता सूची से पहचाने गए और हटाये गये विदेशी नागरिकों की संख्या के संबंध में सबूत पेश करें, और इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग की।

उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म बांटने का आरोप लगाया और इस मुद्दे पर केंद्र की चुप्पी पर सवाल उठाये। कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा के भ्रष्टाचार के आरोपों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अंबानी और अडानी जैसे कॉरपोरेट समूहों का पक्ष ले रही है।

श्री पोन्नम ने कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार अपनी छह गारंटियों और कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू कर रही है। इनमें अच्छी गुणवत्ता वाले चावल, राशन कार्ड, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, बसों में मुफ्त सफर और सरकारी नौकरियों में भर्ती जैसी चीजें शामिल हैं। उन्होंने भाजपा के राज्य नेतृत्व को उनके वादों और कामकाज पर खुली बहस करने की चुनौती दी।

उन्होंने भाजपा पर राष्ट्रीय मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक आलोचना में उलझे रहने का आरोप लगाया और इस संदर्भ में मणिपुर के हालात, बढ़ती कीमतों तथा देश के सामने मौजूद अन्य चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया कि 'एल नीनो' के कारण पैदा हुए सूखे के हालात से निपटने के लिए तेलंगाना को मदद दी जाये।

श्री पोन्नम ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल पात्र नागरिकों को ही अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए।

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