अलवर , अगस्त 14 -- राजस्थान में अलवर न्यायालय के नये परिसर में वकीलों के चैंबर निर्माण के लिए जमीन आवंटन की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को उस समय दो गुटों में बंट गया, जब बार संघ के जिला अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी, जबकि दूसरे पक्ष के वकीलों ने इसे मानने से इन्कार करते हुए धरना-प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया।
सोलह अगस्त को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अलवर दौरे का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
श्री अभिमन्यु सिंह ने कहा कि बार संघ एक बड़ा परिवार है, इसलिए मनमुटाव हो सकता है। सभी वकील मिलकर बैठेंगे और बातचीत से समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा कि 14 वर्ष से चली आ रही मांग महज चार दिन में पूरी होने की दिशा में पहुंची है। मंत्री के माध्यम से और जिला कलेक्टर के स्तर पर बनी सहमति का बार स्वागत करता है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बातचीत के बाद चैंबर निर्माण के लिए करीब साढ़े तीन बीघा जमीन उपलब्ध कराने की बात सामने आयी है। इसे बार संघ के अध्यक्ष पक्ष ने लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
दूसरी ओर, जमीन आवंटन प्रक्रिया का विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने इस सहमति को स्वीकार नहीं किया है।
दूसरे पक्ष के अधिवक्ता संजय पंडित ने कहा कि मौजूदा प्रस्ताव से वह पूरी तरह असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि मिनी सचिवालय में करीब 1650 वर्ग गज जमीन का आवंटन पहले से मौजूद है, जहां कई विभाग भी शामिल हैं। ऐसे में नई जमीन के प्रस्ताव को लेकर भी कई सवाल हैं। उन्होंने कहा कि वकीलों का आंदोलन जारी रहेगा और 16 अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान विरोध किया जायेगा। विरोध कर रहे वकीलों ने आज रैली निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुद्दल ने साढ़े तीन बीघा जमीन के आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीन बिना नक्शे के रूपांतरित नहीं हो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि वकीलों को नियमों में उलझाया जा रहा है और जिस क्षेत्र की जमीन की बात हो रही है, वहां भी बिना नक्शे के आवंटन को लेकर नियमों का सवाल खड़ा होता है।
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