मुजफ्फरपुर , अप्रैल 06 -- बिहार में मुजफ्फरपुर जिले की प्रसिद्ध 'शाही लीची' अपने बड़े आकार, पतले छिलके, सुगंध तथा अद्भुत मिठास के लिए दुनिया भर में मशहूर है और यही खासियत पंजाब के कुछ किसानों को बिहार खींच लाई है,जो इस खुशबू और मिठास को अपने साथ ले जाना चाहते हैं।
बिहार वासियों को बारिश की बूंदों के साथ प्रत्येक वर्ष शाही लीची का बेसब्री से इंतेजार रहता है, लेकिन 2018 में मिले जीआई- टैग ने इसकी मिठास को देश के राज्यों के साथ विदेशों तक पहुंचा दिया। लीची तो हिंदुस्तान के कई इलाकों में मिलती है, लेकिन उनके बीच रानी का ताज तो मुजफ्फरपुर की शाही लीची के पास ही है।
सैकड़ों वर्षों से लीची शहर के नाम से मशहूर बिहार का मुजफ्फरपुर अब आधुनिक लीची बागवानी का राष्ट्रीय केंद्र बनता जा रहा है, जहां देशभर के किसान कौतूहल के साथ आ रहे हैं और ऐसी ही फसल अपने क्षेत्र में उगाना चाहते हैं। मुजफ्फरपुर के लीची बागान और प्रशिक्षण केंद्र बाहर से आने वाले किसानों के लिए पाठशाला बनते जा रहे हैं। यहाँ देश भर से नई पीढ़ी के कृषि उद्यमी आना चाहते हैं और शाही लीची की मिठास को अपने खेतों तथा बाजारों में ले जाना चाहते हैं। बिहार अब लीची उत्पादन में नवाचार की एक जीवंत प्रयोगशाला बन चुका है।
देश के किसानो के कौतुहल की बानगी के रूप में पठानकोट से 22 किसानों का एक दल उन्नत लीची खेती तकनीकों का प्रशिक्षण लेने के लिए मुजफ्फरपुर पहुंचा है। इन किसानों को राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जहां वैज्ञानिक उन्हें उन्नत किस्मों, पौध प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, सिंचाई प्रणाली और उत्पादन बढ़ाने की रणनीतियों की जानकारी दे रहे हैं।
यह प्रशिक्षण केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है। आगंतुक किसानों ने झपहां गांव के बागों का भी दौरा किया, जहां प्रगतिशील किसान भोलनाथ झा ने उच्च घनत्व रोपण तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया है। इस विधि में पेड़ों को 10x15 फीट की दूरी पर लगाया जाता है, जिससे कम जमीन में अधिक उत्पादन संभव होता है और पेड़ों की ऊंचाई भी नियंत्रित रहती है, जिससे फल तोड़ना आसान हो जाता है।
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