सहारनपुर , जुलाई 22 -- उत्तर प्रदेश सरकार में अपर मुख्य सचिव एवं राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) डॉ. सुधीर महादेव बोबड़े ने कहा है कि मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय की जलभराव, आधारभूत सुविधाओं और अन्य आवश्यक समस्याओं के समाधान के लिए शासन गंभीर है तथा इन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र दूर किया जाएगा।

मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बाद डॉ. बोबड़े ने कहा कि शासन विश्वविद्यालय की सभी प्रमुख आवश्यकताओं से भलीभांति अवगत है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं परिसर का निरीक्षण कर आधारभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया है और संबंधित विभागों के माध्यम से समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में जलभराव सबसे गंभीर समस्या है। इस संबंध में तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष बंसल द्वारा लगभग 13 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेजी गई थी। दीक्षांत समारोह के दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी से इस परियोजना के लिए शीघ्र बजट स्वीकृत कराने का आग्रह किया, ताकि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।

डॉ. बोबड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर स्थापित यह विश्वविद्यालय अभी विकास के प्रारंभिक चरण में है। प्रथम चरण के भवन निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं और शीघ्र ही दूसरे चरण का निर्माण प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जलभराव के कारण विश्वविद्यालय को अपना दीक्षांत समारोह परिसर के बजाय शहर स्थित जनमंच सभागार में आयोजित करना पड़ता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।

उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में भवनों एवं कक्षाओं के बेहतर रखरखाव, पर्याप्त फर्नीचर, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था तथा ऊर्जा व्यय कम करने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में खेल मैदान का अभाव है, जबकि सहारनपुर क्षेत्र खेल प्रतिभाओं के लिए जाना जाता है। आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित होने से क्षेत्र के युवाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

डॉ. बोबड़े ने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1990 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में अपने सेवा जीवन की शुरुआत उन्होंने रुड़की में संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में की थी। उस दौरान सहारनपुर क्षेत्र के गन्ना किसानों की समस्याओं को निकट से समझने का अवसर मिला, जिसका लाभ उन्हें बाद में गन्ना एवं चीनी मिल विभाग तथा आबकारी विभाग में वरिष्ठ पदों पर कार्य करते समय मिला।

उन्होंने विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डॉ. विमला वाई की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद वे समर्पण और दूरदृष्टि के साथ विश्वविद्यालय के विकास में जुटी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शासन के सहयोग और प्रभावी नेतृत्व के बल पर मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।

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