राजनांदगांव , जून 17 -- छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा मंगलवार से शासकीय स्कूलों में सुबह एवं शाम की प्रार्थना के दौरान गायत्री मंत्र सहित विभिन्न मंत्रों के उच्चारण को अनिवार्य किये जाने के निर्णय पर ईसाई समाज ने आपत्ति जताते हुए इसे अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए बाध्यकारी नहीं बनाए जाने की मांग की है।
ईसाई समाज के अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने इस संबंध में आज राज्य के सचिव को पत्र सौंपकर अपनी आपत्तियां दर्ज करायी। उन्होंने पत्र में कहा है कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था की गारंटी देता है तथा संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के पालन की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि ये प्रावधान शासकीय अथवा सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या प्रार्थना के लिए बाध्य किए जाने से संरक्षण प्रदान करते हैं।
पत्र में कहा गया है कि गायत्री मंत्र हिंदू सनातन धर्म की आस्था और पवित्रता से जुड़ा एक अत्यंत आदरणीय मंत्र है, किंतु ईसाई समुदाय के बच्चों तथा शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए इसका अनिवार्य उच्चारण उनकी धार्मिक मान्यताओं और अंतःकरण की स्वतंत्रता के प्रतिकूल है।
अध्यक्ष पॉल ने कहा कि स्कूलों का वातावरण हमेशा से सर्वधर्म समभाव और समावेशी रहा है। किसी एक धार्मिक विचार या मंत्र की अनिवार्यता से अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों में असहजता की भावना उत्पन्न हो सकती है, जो उनके मानसिक विकास के लिए उचित नहीं है।
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