विदिशा , सितंबर 08 -- मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देशन में शासकीय आईटीआई विदिशा ने पिछले 10 वर्षों में पहली बार शत-प्रतिशत प्रवेश लक्ष्य हासिल किया है। इसे युवाओं में तकनीकी और कौशल आधारित शिक्षा के प्रति बढ़ते आकर्षण का संकेत माना जा रहा है।

जिले की नवीन शासकीय आईटीआई ग्यारसपुर और कुरवाई ने भी अपने निर्धारित शत-प्रतिशत प्रवेश लक्ष्य को हासिल किया है। जिले की सात शासकीय आईटीआई में विभिन्न रोजगारपरक व्यवसायों की कुल 1268 सीटें हैं, जिनमें युवाओं ने प्रवेश लिया है। इन संस्थानों के माध्यम से युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है।

नोडल प्राचार्या कविता रघुवंशी ने बताया कि युवाओं को आईटीआई में उपलब्ध रोजगारपरक प्रशिक्षण और विभिन्न व्यवसायों की जानकारी देने तथा अधिक से अधिक युवाओं को कौशल शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से 'कौशल की पढ़ाई, चलो आईटीआई' अभियान के तहत व्यापक जागरूकता और संपर्क गतिविधियां संचालित की गईं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय कौशल का युग है। पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीकी और व्यावसायिक कौशल युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आईटीआई युवाओं को हुनर, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का माध्यम बन रही है।

उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रवेश टीम के प्रयासों को देते हुए बताया कि नोडल प्रवेश प्रभारी आलोक रावत और इंदु सेन ने प्रवेश प्रक्रिया के लिए सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की। इसके तहत संभावित अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से लगातार संपर्क कर उन्हें आईटीआई में संचालित रोजगारपरक पाठ्यक्रमों, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों की जानकारी दी गई।

प्रवेश टीम ने अवकाश के दिनों में भी कार्य करते हुए अधिक से अधिक संभावित अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया। शासकीय आईटीआई विदिशा के साथ ग्यारसपुर और कुरवाई की नवीन आईटीआई का शत-प्रतिशत प्रवेश लक्ष्य हासिल करना जिले के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं में तकनीकी शिक्षा की बढ़ती स्वीकार्यता को भी दर्शाता है।

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