नाभा , जून 04 -- पंजाब में पटियाला जिले के नाभा उपमंडल के गांव छत्ते में अनुसूचित जाति परिवारों के कथित सामाजिक बहिष्कार, शामलात भूमि में उनके अधिकारों से वंचित किये जाने और पंचायत भूमि पर अवैध कब्जों के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

पटियाला के उपायुक्त हिमांशु अग्रवाल ने मामले की जांच के लिए अतिरिक्त उपायुक्त (विकास) दमनजीत सिंह मान को आवश्यक निर्देश जारी किये हैं।

भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ और हरमीत सिंह ने गुरुवार को प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में यह एक सकारात्मक शुरुआत है।

श्री कैंथ ने कहा कि गांव छत्ते के दलित परिवार लंबे समय से अपने कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव और कथित बहिष्कार से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि श्री मान तथ्यों के आधार पर निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी करेंगे और यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

श्री कैंथ ने कहा कि शामलात भूमि में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हिस्से पर उनका कानूनी अधिकार है और किसी भी परिवार का सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार भारतीय संविधान की भावना तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के विरुद्ध है। उन्होंने उपायुक्त पटियाला का धन्यवाद करते हुए कहा कि अब प्रशासन को मामले में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा हो सके और गांव में सामाजिक सौहार्द तथा कानून व्यवस्था बनी रहे।

उन्होंने कहा कि भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा इस पूरे मामले पर लगातार नजर रखेगा और अनुसूचित जाति समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी लोकतांत्रिक और कानूनी प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और प्रभावित परिवारों को न्याय मिलेगा।

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