प्रयागराज , अगस्त 16 -- क तरफ पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव और 80वा स्वतंत्रता दिवस मना रहा था तो वही देश के लिए कुर्बानी देने वाले वीर सपूत के परिवार आज भी सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा कर परेशान हो गए है । प्रयागराज में देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीद रमाकांत यादव को शहादत के 23 साल हो गए, लेकिन उनके पैतृक गांव तारडीह में आज तक उनका स्मारक नहीं बन सका।
18 कुमायूं रेजीमेंट में तैनात रमाकांत यादव वर्ष 2003 में जम्मू-कश्मीर की अग्रिम चौकी पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। परिवार का आरोप है कि दो दशक से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी शासन-प्रशासन की फाइलों में उनकी याद सिमटी हुई है।शहीद के बड़े भाई राम अवध यादव ने बताया कि स्मारक निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था।
इसके बावजूद अब तक बजट जारी नहीं हुआ। परिवार लंबे समय से जिला प्रशासन और शासन के अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।राम अवध यादव के मुताबिक, उनके प्रयासों के बाद कनेहटी रेलवे फाटक से तारडीह गांव तक सड़क का निर्माण कराया गया था। हालांकि, अब यह सड़क भी खराब होने लगी है। परिवार की मांग है कि इस मार्ग का नाम 'शहीद रमाकांत यादव मार्ग' रखा जाए और गांव में भव्य स्मारक बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें।
मामले में पीडब्ल्यूडी की ओर से भी पहल की गई थी। वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्य अभियंता केके पहूजा ने शहीद के आवास को जोड़ने वाले मार्ग पर साइन बोर्ड लगाने और मार्ग के नामकरण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। करीब तीन साल बाद भी शासन से प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली और न ही इसके लिए बजट आवंटित हुआ।पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-4 के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र सिंह ने बताया कि विभाग ने शहीद के घर तक मार्ग का निर्माण कराया है। शहीद के नाम का साइन बोर्ड लगाने के लिए पहले भी शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन स्वीकृति और धन आवंटन नहीं होने के कारण काम नहीं हो सका।
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