भोपाल , मई 03 -- मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में प्रतिमाह आयोजित होने वाली शलाका चित्र प्रदर्शनी श्रृंखला के तहत 73वीं शलाका प्रदर्शनी में भील जनजातीय चित्रकार सुनीता भावोर के चित्रों की प्रदर्शनी सह-विक्रय का आयोजन किया गया है।
संग्रहालय के सूत्रों के अनुसार यह प्रदर्शनी तीन मई से प्रारंभ होकर 30 मई तक संग्रहालय की लिखन्दरा प्रदर्शनी दीर्घा में मंगलवार से रविवार तक निरंतर आयोजित की जाएगी। इस आयोजन का उद्देश्य प्रदेश के जनजातीय चित्रकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और चित्रों के विक्रय के लिए मंच उपलब्ध कराना है।
बताया गया कि 32 वर्षीय चित्रकार सुनीता भावोर का जन्म झाबुआ जिले के ग्राम कुन्दनपुर भांडाखेड़ा में हुआ है। सीमित संसाधनों के कारण उन्होंने प्राथमिक स्तर तक ही शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 2009 में उनका विवाह अनिल भावोर के साथ हुआ और वर्तमान में वे भोपाल में रहकर चित्रकला के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
उनके पति अनिल भावोर भी भीली चित्रकला के चर्चित कलाकार हैं। विवाह के बाद सुनीता भावोर ने अपनी छोटी बहन संगीता ताहेड़ के मार्गदर्शन में चित्रकला की बारीकियां सीखीं और कुछ समय तक उनके साथ सहायक के रूप में कार्य किया। प्रसिद्ध भीली चित्रकार भूरीबाई और लाडोबाई से भी उन्हें प्रेरणा मिली है।
सुनीता भावोर ने नई दिल्ली और इंदौर सहित देश के विभिन्न शहरों में आयोजित चित्रकला प्रदर्शनियों में भाग लिया है। उनके चित्रों में जंगल, पहाड़, पशु-पक्षी और जनजातीय जीवन से जुड़े संस्कारों का सजीव चित्रण प्रमुख रूप से देखने को मिलता है।
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