मुंबई , सितंबर 18 -- महाराष्ट्र में लंबे समय से चले आ रहे सूखे और मानसूनी वर्षा न होने से उत्पन्न गंभीर कृषि संकट के बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर राजनीतिक हमला बोलते हुए प्रशासनिक जटिलताओं को दरकिनार कर पूरे राज्य को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है।

श्री पवार ने मुख्यमंत्री को संबोधित विस्तृत पत्र में चेतावनी दी है कि ग्रामीण महाराष्ट्र एक अभूतपूर्व मानवीय आपदा की ओर बढ़ रहा है, जिसके लिए प्रक्रियात्मक देरी के बजाय आपातकालीन हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उन्होंने पत्र में औपचारिक तकनीकी मानदंडों और पांच अक्टूबर के मानकों को दरकिनार कर गंभीर रूप से प्रभावित तालुकाओं को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित करने तथा राहत उपायों को तुरंत लागू करने और बर्बाद हुई फसलों के लिए कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रत्यक्ष मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही जिनकी आजीविका ठप हो गयी है, उन खेत मजदूरों के बैंक खातों में 25,000 रुपये की विशेष सहायता राशि सीधे भेजने की भी मांग की गयी है। अन्य मांगों में पूर्ण कर्ज माफी पैकेज लागू करना, नया फसल ऋण देना और नियमित ऋण चुकाने वालों के लिए प्रोत्साहन बोनस को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये दोगुना करना शामिल है।

श्री पवार ने एक रुपये वाली फसल बीमा योजना को पिछले प्रभाव से लागू करने, बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए हटाये गये किसान-हितैषी प्रावधानों को बहाल करने और पिछले वर्ष की बेमौसम बारिश का बकाया वितरित करने की मांग की।

उन्होंने सूखे इलाकों एवं बागों के लिए आपातकालीन पानी के टैंकर तैनात करने, बिना कड़े प्रतिबंधों के मवेशी शिविर स्थापित करने, जले हुए कृषि बिजली ट्रांसफार्मर (डीपी) को बदलने के लिए राज्यव्यापी ऊर्जा विभाग का विशेष अभियान चलाने और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के छात्रों की पूरी शैक्षणिक फीस माफ करने की मांग भी उठायी। उन्होंने कहा कि दैनिक वर्षा, जल उपलब्धता, फसल की स्थिति और मवेशियों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए राज्य और जिला दोनों स्तरों पर समर्पित कमान एवं नियंत्रण कक्ष स्थापित किये जायें।

श्री पवार ने कहा कि लंबे समय के इस सूखे के कारण सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तुअर, मूंग और उड़द सहित प्रमुख खरीफ फसलें पूरी तरह से सूख गयी हैं। कीटों का प्रकोप बढ़ गया है, उत्पादन लागत की भरपाई असंभव हो गयी है और चारे की सुरक्षा के साथ-साथ बुनियादी पीने का पानी गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करने और महाराष्ट्र के बदहाल ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र को पूर्ण तबाही से बचाने के लिए तत्काल कार्यान्वयन आदेश जारी करने का आग्रह किया।

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