आजमगढ़ , सितंबर 24 -- शम्भूपुर हत्याकांड में माता-पिता का साया खो चुकीं दो मासूम बच्चियों के पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा और भविष्य के लिए आजमगढ़ पुलिस ने सहयोग का संकल्प लिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने बृहस्पतिवार देर शाम अपना एक माह का वेतन देने की घोषणा की, जबकि जिले के करीब पांच हजार पुलिसकर्मी एक-एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए समर्पित करेंगे।

पुलिस के अनुसार शम्भूपुर हत्याकांड में तीन लोगों की हत्या के बाद आरोपी अरविंद अपने तीन बच्चों और लाइसेंसी रिवॉल्वर के साथ कमरे में बंद हो गया था। पुलिस और परिजन करीब सात घंटे तक उसे समझाते रहे तथा बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की अपील करते रहे, लेकिन वह नहीं माना। इस दौरान वह बच्चों को गोली मारने की धमकी देता रहा।

देर रात कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनाई देने पर बच्चों की जान बचाने के लिए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। वहां नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। पुलिस टीम उसे तत्काल अस्पताल ले गई, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। वहीं 11 वर्षीय परी और छह माह की बच्ची को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। परी की कोहनी के पास मामूली खरोंच आई।

एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज ब्लैकनिंग, टैटूइंग, स्कॉर्चिंग, गोली की ट्रैजेक्टरी और एंट्री वुंड से जुड़े तथ्य घटनाक्रम के पुलिस विवरण से मेल खाते हैं। पुलिस के अनुसार घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शौर्य को गोली अरविंद द्वारा मारे जाने का निष्कर्ष सामने आया है। पुलिस का कहना है कि शौर्य की मृत्यु पुलिस की गोली से नहीं हुई।

पुलिस के मुताबिक, सकुशल बचाई गई परी ने भी बताया कि उसके पिता अरविंद ने ही उसके भाई शौर्य को गोली मारी थी और बच्चों को जान से मारने की धमकी दे रहे थे। बच्चे को गोली लगने के बाद अरविंद ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग की। बच्चों की सुरक्षा और पुलिसकर्मियों की आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हुआ। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

पूरे अभियान के दौरान एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह घटनास्थल पर मौजूद रहकर पुलिस टीम को दिशा-निर्देश देते रहे।

पुलिस के अनुसार घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य संकलित किए गए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बच्ची के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इस घटना के बाद दोनों बच्चियों के पालन-पोषण और शिक्षा के सामने खड़ी चुनौती को देखते हुए आजमगढ़ पुलिस ने उनकी मदद का निर्णय लिया है। एसएसपी ने एक माह का वेतन देने की घोषणा की है, जबकि करीब पांच हजार पुलिसकर्मी अपने एक-एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देंगे।

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