इटावा , फरवरी 26 -- उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित फिशर वन क्षेत्र में स्थापित शमसुद्दीन की कथित अवैध मजार को लेकर वन विभाग की कार्रवाई तेज हो गई है। विभाग ने मुस्लिम पक्ष को 23 मार्च तक भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। बढ़पुरा रेंज के रेंजर अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि मजार के केयरटेकर फजले इलाही समेत अन्य लोगों की ओर से राहत की गुहार लगाए जाने पर जिला वन अधिकारी ने 23 मार्च तक का अंतिम स्मरण पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित पक्ष के पास भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज हों तो वे वन विभाग मुख्यालय इटावा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित तिथियों 5 फरवरी, 16 फरवरी और 20 फरवरी तक कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे पूर्व 23 जनवरी को केयरटेकर को नोटिस जारी कर दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, जिसकी प्रति मजार की दीवार पर भी चस्पा की गई थी।

जनवरी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यालय से प्राप्त शिकायत के बाद यह मामला सुर्खियों में आया था। इसके पश्चात प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) ने वन अधिनियम के तहत प्रकरण को अपनी अदालत में दर्ज कर सुनवाई प्रारंभ की।

वन विभाग का कहना है कि यदि 23 मार्च तक भी भूमि संबंधी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो वन अधिनियम के तहत अवैध अतिक्रमण मानते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।

इस बीच, रमजान को देखते हुए मुस्लिम पक्ष को 23 मार्च तक की मोहलत दी गई है। विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के बाद 23 जनवरी से मजार स्थल तक आम लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित बताई गई है।

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