वाराणसी , सितंबर 14 -- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का 102वां प्राकट्योत्सव सोमवार को काशी स्थित श्रीविद्यामठ सहित देश-विदेश में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
श्रीविद्यामठ में वरिष्ठ वैदिक आचार्यों के सान्निध्य और मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ब्रह्मलीन शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन किया गया। इसके बाद आचार्य मणि झा, ओमप्रकाश पाण्डेय, विनय भूषण तिवारी, शिवाकांत मिश्रा और अनिरुद्ध मिश्रा ने रुद्राभिषेक कराया। बाद में मोदक से अर्चन किया गया तथा 108 वैदिक विद्यार्थियों ने चतुर्वेद का पारायण किया। मठ में दिनभर भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया गया।
मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान दो बार जेल गए थे। उन्होंने सनातन धर्म और राष्ट्रहित में विभिन्न कार्य किए। उन्होंने बताया कि प्राकट्योत्सव छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा, ज्योतिर्मठ सहित देश-विदेश में भी मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित