वाराणसी , मार्च 11 -- ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा रामानंदी संप्रदाय के विरुद्ध की गई कथित टिप्पणी से काशी के संतों में गहरा रोष है।

नरहरिपुरा स्थित पातालपुरी मठ में बुधवार को जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में रामानंदी संप्रदाय के संतों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें उपस्थित संतों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की।

संतों ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं को 'धर्मसम्राट' समझने की भूल न करें। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग हिंदुओं के दमन में शामिल रहे हैं, आज शंकराचार्य उन्हीं की गोद में बैठकर हिंदुओं को बांटने की साजिश रच रहे हैं। संतों ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों के अपने एजेंडे हो सकते हैं, किंतु संतों को किसी दल विशेष के अनुरूप व्यवहार नहीं करना चाहिए। किसी को भी स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए दूसरे संप्रदाय को नीचा दिखाने का अधिकार नहीं है।

जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा, "यदि वे स्वयं को शंकराचार्य कहते हैं, तो उन्हें देशभर में पदयात्रा कर भारत की आत्मा को समझना चाहिए। श्री राम भारत की आत्मा हैं और रामानंदी संप्रदाय ने रामभक्ति के माध्यम से ही भारत की संस्कृति और हिंदुत्व को सुरक्षित रखा है। यदि जगद्गुरु रामानंद जी महाराज न होते, तो आज न हिंदू बचता और न ही भारतीय संस्कृति।"उन्होंने कहा कि स्वयं को शंकराचार्य कहने वाले व्यक्ति को किसी राजनेता की भांति बयानबाजी शोभा नहीं देती। जिन शक्तियों ने देश का विभाजन किया, राम मंदिर का विरोध किया और सेक्युलरिज्म के नाम पर हिंदू धर्म को नीचा दिखाया, आज स्वामी जी उन्हीं के साथ खड़े होकर हिंदू हितों की रक्षा करने वाली सरकार को चुनौती दे रहे हैं। गौ-सेवा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ स्वयं गौशाला में गौवंश की सेवा करते हैं, जबकि स्वामी जी अपनी सुख-सुविधाओं से बाहर नहीं निकलते।

संतों ने बैठक में चेतावनी जारी करते हुए कहा गया कि भविष्य में भगवान राम या रामानंदी संप्रदाय के विरुद्ध कोई भी अमर्यादित टिप्पणी सहन नहीं की जाएगी। यदि ऐसा पुनः हुआ, तो काशी के सभी 80 मठ उनके विरुद्ध लामबंद होंगे और देश भर के करोड़ों रामानंदी अनुयायी सड़कों पर उतरने को विवश होंगे। संतों ने कहा कि हिंदू धर्म किसी की निजी जागीर नहीं है। भारतीय संस्कृति त्याग, दया और सहिष्णुता पर टिकी है, जो भगवान राम का आदर्श है।

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