दरभंगा , अप्रैल 22 -- बिहार के राज्यपाल सह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन ने बुधवार को कहा कि व्यावसायिक अनुसंधान सिर्फ देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लोगों के कल्याण के लिए भी होना चाहिए। राज्यपाल श्री हसनैन ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विश्वविद्यालय वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग के तत्त्वावधान में "समकालीन समय में व्यावसायिक अनुसंधान" विषय पर आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन कार्यक्रम का उद्घाटन करते कहा कि विकसित भारत निर्माण में देश के जीडीपी के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रति व्यक्ति आय तथा मानव प्रसन्नता आदि क्षेत्र भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज एवं सरकार का हर अंग मिलकर अच्छा काम करे तो विकसित भारत-2047 का लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकता है।
श्री हसनैन ने कहा कि व्यवसाय का क्षेत्र बहुत ही विस्तृत एवं समाजोपयोगी है, जिसमें नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। व्यवसाय अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए आपसी समझ, नेतृत्व क्षमता एवं निरंतरता आवश्यक है।उन्होंने कहा कि बिहार में बौद्धिक क्षमता अत्यधिक है। उन्होंने नशा मुक्ति, टीवी उन्मूलन तथा प्लास्टिक से मुक्ति का संदेश देते हुए कहा कि नशा से न केवल व्यक्ति, बल्कि परिवार एवं उनके खानदान नष्ट हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत ने पोलियो एवं कोविड आदि से लड़कर खत्म किया है, उसी तरह हम लोगों जागरूकता के माध्यम से टीबी मुक्त भारत बनाएंगे। आज प्लास्टिक की चपेट में मानव के साथ जानवर भी आ रहे हैं। यह हमारे जीवन को विकलांग बना रहा है। हानिकारक प्लास्टिक समाज के लिए बिल्कुल ही स्वीकार नहीं होना चाहिए।
स्वागत संबोधन करते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने कहा कि मिथिला ज्ञान एवं सीता की जन्मभूमि है। उन्होंने कहा कि अगस्त, 1972 को स्थापित यह विश्वविद्यालय दो प्रमंडलों-दरभंगा एवं मुंगेर के चार जिलों में फैला है, जिसमें 44 अंगीभूत कॉलेज, 40 संबद्धता प्राप्त कॉलेज, 33 बी एड कॉलेज तथा 07 सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूशन हैं।
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