हल्द्वानी , अगस्त 29 -- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हल्द्वानी में कुमाऊं मंडल के व्यापारियों, उद्योग प्रतिनिधियों और विभिन्न व्यापार मंडलों के पदाधिकारियों के साथ संवाद किया।
आईटीसी फॉर्च्यून में आयोजित संवाद कार्यक्रम में व्यापारियों ने जीएसटी प्रक्रिया को सरल करने, मंडी शुल्क, अतिक्रमण और पार्किंग, लीज नवीनीकरण, औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार तथा स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। मुख्यमंत्री ने सभी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापारी और उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। व्यापारियों की प्रगति में ही प्रदेश की आर्थिक प्रगति निहित है। सरकार व्यापारियों और उद्यमियों के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और सरल कारोबारी वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
श्री धामी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में 29 हजार से अधिक नई एमएसएमई इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिनसे लगभग 1.27 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार की सोच है कि शासन उद्योगों के लिए बाधा नहीं, बल्कि सहयोगी और भागीदार बने।
उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सरल बनाने के लिए 'निवेश मित्र' व्यवस्था लागू की गई है। वर्तमान में 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध हैं।उन्होंने आगे कहा कि इन्वेस्टर्स समिट के दौरान उद्योग जगत से मिले सुझावों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने 30 से अधिक नीतियां तैयार की हैं। इन नीतियों के निर्माण में व्यापार और उद्योग जगत के सुझावों को प्राथमिकता दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड स्टार्टअप नीति लागू की गई है। इसके साथ ही 200 करोड़ रुपये का वेंचर फंड स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों का युवा अपने गांव में रहकर भी देश और दुनिया के बाजार के लिए कारोबार खड़ा कर सके।
श्री धामी ने कहा कि औद्योगिक विकास को केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में विशेष औद्योगिक पार्कों के लिए भूमि चिन्हित की गई है। हरिद्वार में फ्लैटेड फैक्ट्री विकसित की जा रही है। भविष्य में सेलाकुई और पंतनगर में भी इस प्रकार की सुविधाएं विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि जहां प्रतिभा है, वहीं अवसर मिलें और जहां युवा हैं, वहीं रोजगार के साधन विकसित हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के उत्पाद, शिल्पकार, किसान, छोटे व्यापारी और स्थानीय उद्यमी प्रदेश के विकास के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। 'वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट' जैसी पहलों के जरिए स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को बड़े बाजारों से जोड़ा जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य 'मेड इन उत्तराखंड' को गुणवत्ता और विश्वास के साथ राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार में मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। राज्य में फार्मा, हर्बल, आयुष, इंजीनियरिंग और ऑटो-कंपोनेंट जैसे क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने व्यापारियों और उद्योग प्रतिनिधियों से प्रदेश में निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को और बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा, "आप व्यापार बढ़ाइए, सरकार आपके साथ खड़ी है।" उन्होंने कहा कि व्यापार एवं उद्योग जगत की सहभागिता से विकसित उत्तराखंड के संकल्प को साकार किया जाएगा और प्रदेश विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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