चंडीगढ़ , जून 01 -- हरियाणा सरकार ने व्यापारियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 'एकमुश्त निपटान योजना-2026' को लागू करने और इसकी अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। इस योजना का उद्देश्य लंबे समय से लंबित कर विवादों का त्वरित और स्थायी समाधान कर व्यापारियों को राहत प्रदान करना है।
सरकार का मानना है कि इससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और कारोबारियों को पुराने कर मामलों से छुटकारा मिलेगा।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह योजना एक जून से शुरू होकर 28 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी यह योजना काफी सफल रही है। वर्ष 2025 में प्रदेश के 1,15,223 व्यापारियों ने इसका लाभ उठाकर अपने लंबित कर मामलों का निपटान किया था।
योजना के तहत छोटे करदाताओं को विशेष राहत प्रदान की गयी है। जिन व्यापारियों पर किसी भी वित्तीय वर्ष में एक लाख रुपये तक का कर बकाया है, उनका कर, ब्याज और जुर्माना स्वतः माफ कर दिया जाएगा। इसके लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के अंतर्गत एक लाख रुपये से अधिक के बकाया मामलों में व्यापारियों को कर राशि पर 70 प्रतिशत तक की छूट का लाभ मिलेगा। इसके अलावा पात्र मामलों में ब्याज और जुर्माने में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान किया गया है, जिससे करदाताओं की देनदारी में उल्लेखनीय कमी आएगी।
योजना के अंतर्गत व्यापारियों को अंतिम निपटान राशि का भुगतान आसान किस्तों में करने की सुविधा भी दी गयी है, जिससे उन पर एकमुश्त भुगतान का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
सरकार के अनुसार यह योजना राज्य के सात विभिन्न कर अधिनियमों के अंतर्गत लंबित मामलों पर लागू होगी। सरकार ने सभी पात्र व्यापारियों से 28 सितंबर से पहले योजना का लाभ उठाने की अपील की है, ताकि वे पुराने कर विवादों और वित्तीय बोझ से मुक्त होकर अपने कारोबार पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
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