अमरोहा , अक्टूबर 14 -- दीपावली से पहले खाद्य तेल की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की निगाहें बाजार पर टिकी हैं। प्रमुख व्यापारी नेता ईशान अग्रवाल ने बुधवार को बताया कि वैश्विक बाजार में आपूर्ति की अनिश्चितता और त्योहारों के दौरान खपत बढ़ने की संभावना के बीच खाद्य तेलों के भाव में बड़ी गिरावट की उम्मीद सीमित है।

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से आयात शुल्क में कटौती किए जाने से कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलने की संभावना है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल बड़ी राहत के बजाय कीमतों में स्थिरता की उम्मीद अधिक महत्वपूर्ण है।खाद्य तेल घरेलू रसोई के जरूरी खर्चों में शामिल है।

श्री अग्रवाल ने बताया कि सरसों, सोया, पाम और सूरजमुखी तेल की कीमतों में बदलाव का असर सीधे परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है। व्यापार सुरक्षा फोरम नगर अध्यक्ष अजय अग्रवाल ने बताया कि त्योहारों के दौरान मिठाइयों, नमकीन और पकवानों की तैयारी बढ़ने से मांग में मौसमी तेजी आने की संभावना रहती है। ऐसे में बाजार में आपूर्ति और मांग का संतुलन कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

उन्होने बताया कि केंद्र सरकार ने सितंबर में प्रमुख आयातित खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क में कटौती की थी, ताकि आयात लागत का दबाव कम हो और इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंच सके। हालांकि,रुस-युक्रेन संघर्ष के कारण सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की अनिश्चितता बनाए रखी है। इसकी भरपाई के लिए पाम तेल की खरीद बढ़ने से विभिन्न खाद्य तेलों के बाजार में आपसी प्रतिस्पर्धा और उपलब्धता भी अहम हो गई है।

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