नयी दिल्ली , फरवरी 17 -- बैंक ऑन के व्यवसाय प्रतिनिधियों (बीसी) पर निगरानी संबंधी समिति की राजधानी में मंगलवार को आयोजित दसवीं बैठक की अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने की।

वित्त मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार श्री नागराजू ने सभी बैंकों को परामर्श दिया कि वे बीसी प्वाइंट्स पर उपलब्ध सेवाओं के दायरे को और अधिक व्यापक बनाएं तथा बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप सेवाओं की श्रृंखला का निरंतर विस्तार करें।वर्तमान में, अधिकांश बैंक बीसी प्वाइंट्स पर न्यूनतम 42 सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जिनमें खाता खोलना, नकद जमा एवं निकासी, री-केवाईसी, सूक्ष्म बीमा योजनाओं में नामांकन आदि प्रमुख हैं।

बैठक में निगरानी समिति के सदस्यों के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वित्तीय समावेशन एवं विकास विभाग के मुख्य महाप्रबंधक, एनपीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कार्यकारी निदेशक, निजी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, इंडियन बैंक एसोसिएशन, नाबार्ड और बीसी एसोसिएशन के अधिकारी उपस्थित थे ।

चर्चा के दौरान बीसी के कार्यकलापों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इनमें बीसी एजेंटों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं, बीसी की डिजिटल निगरानी, विशेषकर पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी क्षेत्रों में बीसी एजेंटों की कमीशन संरचना, बीसी की जियोटैगिंग आदि प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे।

सभी कार्यसूची मदों पर हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। श्री नागराजू ने गत 20 नवंबर से बीसी रजिस्ट्री को क्रियान्वित करने में इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के प्रयासों की सराहना की। इस रजिस्ट्री में नकली बीसी की पहचान, बीसी के प्रदर्शन से संबंधित सेवा रिकॉर्ड का संधारण आदि जैसी महत्वपूर्ण विशेषताएं शामिल हैं।

समिति के सदस्य बैंकों द्वारा अपने बीसी प्वाइंट्स की जियोटैगिंग का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है।

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