मुंबई , मई 02 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि स्थिरता का एक वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता भारत में है और इसके लिए समावेशी विकास की आवश्यकता होगी जिसमें समाज के सभी वर्गों ,विशेष रूप से आदिवासी समुदायों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल किया जाए।

श्री भागवत ने आज यहां गेटवे ऑफ इंडिया पर आयोजित 'कर्मयोगी एकल शिक्षक मेला' को संबोधित करते आदिवासी समुदायों को पहचानने और उन्हें व्यापक विकास के ढाँचे में एकीकृत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों ने ऐतिहासिक रूप से भारत के सांस्कृतिक लोकाचार और सामूहिक कल्याण के मूल्यों को संरक्षित रखा है। सेवा को दान के रूप में नहीं, बल्कि एक मौलिक कर्तव्य और आत्म-विकास के साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा केवल सहानुभूति पर आधारित न होकर, समर्पण और प्रयास से प्रेरित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यतागत जड़ें वनों से गहराई से जुड़ी हुई हैं। वेदों की रचना वहीं हुई थी और देश की पहचान इस विरासत से अविभाज्य है। उन्होंने बताया कि कई आदिवासी समुदायों को अभी भी देश के अन्य हिस्सों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच प्राप्त नहीं है।इसलिए उन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा में एकीकृत किए बिना, समग्र सामाजिक प्रगति अधूरी ही रहेगी। उन्होंने जोर दिया कि समाज को भी आदिवासी परंपराओं और मूल्यों से सीखना चाहिए।

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीति को केवल सत्ता की होड़ से ऊपर उठकर विकास और समाज सेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने 'कर्मयोगियों' यानी वंचित और हाशिए पर पड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित व्यक्तियों की संख्या बढ़ाने का आह्वान किया। तीन दशक पहले के प्रयासों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि बाबा आमटे ने गढ़चिरौली के आदिवासी क्षेत्रों में शैक्षिक आंदोलन की शुरुआत उस समय की थी, जब वहाँ नक्सली प्रभाव काफ़ी अधिक था। उन्होंने लक्ष्मण मानकर की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने इस शैक्षिक आंदोलन को प्राथमिकता देने के लिए राजनीति छोड़ दी थी।

श्री गडकरी ने बताया कि यह पहल अभी बिना किसी सरकारी फंडिंग के चल रही है, जिसमें लगभग 1,400 शिक्षक लगभग 32,000 छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य और विस्तार करना है, जिसके तहत पूरे महाराष्ट्र में 5,000 शिक्षकों और 100,000 छात्रों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रयास का उद्देश्य उन आदिवासी युवाओं की क्षमता को उजागर करके आर्थिक और सामाजिक असमानताओं को दूर करना है, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से अवसरों की कमी का सामना करना पड़ा है।

नागपुर स्थित 'एल. लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था' द्वारा संचालित 'एकल विद्यालय' पहल अब विदर्भ से आगे बढ़कर पूरे राज्य में अपने कार्यों का विस्तार कर रही है। यह संस्था गडकरी के मार्गदर्शन में काम करती है और इसकी अध्यक्षता मुंबई के उद्योगपति अतुल शिरोडकर करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान, सामाजिक विकास में योगदान देने वाले शिक्षकों, व्यक्तियों और संस्थाओं को 'कर्मयोगी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। राज्यसभा की नव-निर्वाचित सदस्य मायाताई इवनाते को भी सम्मानित किया गया।

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