ब्रसेल्स/हैदराबाद , जनवरी 14 -- तेलंगाना के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) सी. सुदर्शन रेड्डी ने बुधवार को ब्रसेल्स में वरिष्ठ यूरोपीय अधिकारियों से कहा कि भारत ने दुनिया की सबसे पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत चुनाव प्रबंधन प्रणाली बनाई है जो पैमाने, विश्वसनीयता और कानूनी ताकत के मामले में एक वैश्विक मानक स्थापित करती है।

चुनाव आयुक्त कार्यालय से बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सीईओ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एफ़पीएस इंटीरियर की महानिदेशक एच.ई. एनाबेले हेगमैन और यूरोपीय संसद के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की, जिसके दौरान भारत के चुनाव मॉडल और परिचालन ढांचे को विस्तार से प्रस्तुत किया गया।

श्री रेड्डी ने बातचीत को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने लगभग 97.9 करोड़ मतदाताओं के लिए 2024-25 के चुनाव चक्र का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया, जिसमें दो करोड़ से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया, जिससे यह दुनिया में कहीं भी किया गया सबसे बड़ा चुनावी अभियान बन गया।

उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया 23 भाषाओं, विविध धर्मों और हिमालयी क्षेत्रों से लेकर द्वीप गांवों तक की चरम भौगोलिक स्थितियों में काम करती है, जिसमें मतदान केंद्र एक से लेकर 1,500 मतदाताओं की जरूरतों को पूरा करते हैं।

श्री रेड्डी ने मतदाता पंजीकरण ढांचे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत ने निरंतर पंजीकरण और सालाना चार योग्यता तिथियों के माध्यम से दुनिया की सबसे बड़ी मतदाता सूची बनाकर रखी है। चुनाव अधिकारियों ने जनवरी 2025 में प्रकाशित लगभग एक अरब नामों में से लगभग दो करोड़ दावों और आपत्तियों का समाधान किया, जबकि अंततः केवल 89 अपीलें दायर की गयीं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल और बूथ-स्तरीय एजेंट पूरी प्रक्रिया के दौरान "समवर्ती लेखा परीक्षक" के रूप में कार्य करते हैं।

सीईओ ने मतदान तकनीक पर कहा कि वीवीपैट के साथ भारत की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) गैर-नेटवर्क वाली हैं और छेड़छाड़-प्रूफ होने के लिए डिज़ाइन की गयी हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान, भारत ने 62 लाख ईवीएम इकाइयों का उपयोग करके एक ही दिन में 70.5 करोड़ वोटों की गिनती की। उन्होंने बताया कि 81.7 करोड़ से अधिक वीवीपैट पर्चियों को मतदाताओं द्वारा देखा गया और गिनती के दौरान 1.6 करोड़ पर्चियों के भौतिक सत्यापन में कोई बेमेल नहीं पाया गया।

श्री रेड्डी ने यह भी कहा कि पिछले 35 वर्षों में ईवीएम को लेकर सभी 41 कानूनी चुनौतियों को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया है।

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