मुंबई , सितंबर 10 -- संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को यहां ग्लोबल फिनटेक समिट के एक सत्र में एक समावेशी और विश्वसनीय डिजिटल वित्तीय तंत्र की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि " वित्त के बुद्धिमान (डिजिटल बुद्धमत्ता आधारित) बनने से पहले उसका समावेशी बनना आवश्यक है।"यहां जियो वर्ल्डसेंटर में 8-11 सितंबर तक आयोजित इस सम्मेलन के एक सत्र को संबोधित करते हुए श्री सिंधिया ने यह भी कहा कि दूरसंचार नेटवर्क एक ऐसी अदृश्य राजमार्ग व्यवस्था है, जिसे देखा नहीं जा सकता, लेकिन यही वह आधारभूत संरचना है जिस पर फिनटेक का विकास होता है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटिंग क्षमता और भरोसे के साथ मिलकर कनेक्टिविटी नई डिजिटल त्रिमूर्ति का निर्माण करती है, जो डिजिटल वित्त के अगले चरण को गति प्रदान कर रही है।

उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल इंडिया ने पहुंच का लोकतंत्रीकरण किया है, तो इंटेलिजेंट इंडिया को बुद्धिमत्ता का लोकतंत्रीकरण करना होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) केवल कॉरपोरेट कंपनियों या बैंकों तक सीमित नहीं रह सकती। यह प्रत्येक नागरिक के लिए उपलब्ध एक ऐसा उपकरण बनना चाहिए, जिससे हर व्यक्ति वर्तमान में हो रहे परिवर्तन का लाभ उठा सके।

श्री सिंधिया ने कहा कि आज का भारत तकनीक के उपभोक्ता से तकनीक निर्माता की ओर बढ़ रहा है। भारत के स्वदेशी 4जी दूरसंचार स्टैक पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐतिहासिक रूप से दूरसंचार स्टैक का विकास कुछ चुनिंदा देशों और कंपनियों द्वारा ही किया जाता रहा है। अब भारत ने अपना स्वदेशी 4जी स्टैक विकसित कर लिया है और 5जी पर भी काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत का 6जी मिशन पहले ही शुरू हो चुका है। भारत का लक्ष्य वैश्विक 6जी पेटेंट में 10 प्रतिशत योगदान देना और 6जी मानकों के विकास में एक महत्वपूर्ण एवं मूल्यवान भागीदार बनना है।

समापन में श्री सिंधिया ने कहा कि भारत को "भारत में नवाचार करना होगा, भारत में सेवाएँ प्रदान करनी होंगी, दुनिया की सेवा करनी होगी और उसे सुरक्षित रूप से सेवा प्रदान करनी होगी।" उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य कनेक्टेड भारत से बुद्धिमान डिजिटल वित्त और फिर सशक्त वित्त की ओर बढ़ना होना चाहिए। इसी प्रकार, हमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से विश्वसनीय आधारभूत संरचना की ओर आगे बढ़ना होगा।

संचार मंत्री ने देश में पिछले एक दशक में दूरसंचार सुविधाओं के तीव्र विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि एक दशक में ब्रॉडबैंड पहुंच 16 गुना बढ़ी, 6 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ से अधिक हो गयी है। ब्रॉडबैंड की पहुंच भी मात्र 6 करोड़ से बढ़कर 103 करोड़ हो गई है, जो 10 वर्षों में लगभग 16 गुना वृद्धि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी भारत और पूरी दुनिया में सर्वव्यापी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन अब बैंक शाखाओं में बदल गए हैं, जो नागरिकों को इंटरनेट कनेक्टिविटी से आगे ले जाकर ऋण और निवेश जैसी वित्तीय सेवाओं से जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 6.5 लाख गांवों के डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदार बनने के साथ प्रत्येक कनेक्टेड गांव वैश्विक फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र का सदस्य बन सकता है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए विस्तृत नेटवर्क की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि 26 महीनों में 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंचे 5जी नेटवर्क की पहुंच सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे कम लागत वाली डेटा राजधानी बन गया है, जिससे डिजिटल तकनीक आम लोगों के लिए लगातार अधिक सुलभ होती जा रही है।

श्री सिंधिया ने मोबाइल भुगतान ऐप यूपीआई की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत पहले महीने में लगभग 90,000 लेनदेन से हुई थी और आज 740 से अधिक बैंक इससे जुड़ चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई से लगभग 24,162 करोड़ लेनदेन किये गये जिनका कुल मूल्य लगभग 314 लाख करोड़ रुपये रहा। यह भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा बड़े पैमाने पर हासिल की जा सकनेश्री सिंधिया ने कहा कि घरेलू डिजिटल लेनदेन में 84 प्रतिशत लेनदेन यूपीआई के माध्यम से होते हैं। वहीं, वैश्विक स्तर पर रियल-टाइम डिजिटल भुगतान की कुल मात्रा में भारत की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत है।

उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र को देते हुए कहा कि भारत की सफलता बड़े पैमाने पर विकसित की गई प्रौद्योगिकी की शक्ति को प्रदर्शित करती है।

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