नयी दिल्ली , जून 13 -- दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने शनिवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच दिल्ली सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने का दावा किया है।

श्री सूद ने आज कहा कि बिजली खरीद लागत में भारी वृद्धि के बावजूद सरकार ने उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (पीपीएसी) कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि बिजली कानूनों के तहत पहले से लागू एक नियामक प्रावधान है। इसके माध्यम से बिजली वितरण कंपनियां ईंधन और बिजली खरीद की बढ़ी हुई लागत का समायोजन करती हैं।

उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण पिछले एक महीने में बिजली खरीद की लागत में करीब 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने औसतन केवल 2.4 प्रतिशत पीपीएसी वृद्धि की अनुमति दी है ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ सीमित रखा जा सके।

श्री सूद के अनुसार पहले पीपीएसी की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के पूरे प्रभाव से उपभोक्ताओं को बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पीपीएसी देशभर में लागू एक सामान्य नियामक व्यवस्था है और इसका निर्धारण बिजली कानूनों के अनुसार किया जाता है। उन्होंने कहा कि डीईआरसी का ताजा आदेश बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा।

श्री सूद ने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस विषय पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि बढ़ती ऊर्जा लागत का अनुचित भार जनता पर न पड़े।

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