नयी दिल्ली , मार्च 02 -- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि भारत का वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है जो सीखने, अनुसंधान करने, नवाचार करने और उसे लागू करने के लिये अपार अवसर प्रदान करता है।

श्री प्रधान ने सोमवार को आयोजित 'स्टडी इन इंडिया एडु-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026' को संबोधित किया। इस सम्मेलन में उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करने के लिए 50 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त, राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि और मंत्रालय के अधिकारी एकत्रित हुए। इस दौरान श्री प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत भारत की शिक्षा प्रणाली में हुए बदलावों के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना की है, जो स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ का प्रतीक होगा। इस संदर्भ में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है, जो सीखने, अनुसंधान करने, नवाचार करने और उसे लागू करने के अपार अवसर प्रदान करता है।

शिक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका जीवंत ज्ञान तंत्र, जनसांख्यिकीय लाभांश और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति 2020 और 'स्टडी इन इंडिया' पहल के माध्यम से देश छात्रों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार कर रहा है।

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