नयी दिल्ली , अक्टूबर 29 -- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे ने गुरुवार को कहा कि वैज्ञानिक विचारों को समाज के लिए उपयोगी समाधानों में बदलने के लिए उद्योग, शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप और प्रौद्योगिकी उपयोगकर्ताओं के बीच सहयोग जरूरी है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आज बताया कि इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026 में स्वायत्त प्रणालियों, फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स के जरिए वैज्ञानिक अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचारों में आने वाले बदलावों पर चर्चा की गयी।
प्रो. वाघमारे ने सत्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि वैज्ञानिक विचारों को समाज के लिए उपयोगी समाधानों में बदलने के लिए उद्योग, शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप और प्रौद्योगिकी उपयोगकर्ताओं के बीच सहयोग जरूरी है। अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणालियों पर डीएसटी के राष्ट्रीय मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देश के 25 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित किये गये हैं। ये केंद्र शिक्षा जगत, उद्योग और स्टार्ट-अप के बीच समन्वय स्थापित कर प्रयोगशालाओं में विकसित विचारों को बाजार तक पहुंचाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि मिशन का पहला चरण दिसंबर 2027 में समाप्त होने वाला है और सत्र में विशेषज्ञों की चर्चा एवं सुझाव इसके दूसरे चरण की योजना बनाने में उपयोगी होंगे।
नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि फिजिकल एआई केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी चुनौती नहीं, बल्कि सिस्टम इंजीनियरिंग से संबंधित विषय भी है। उन्होंने बताया कि रोबोट और स्वायत्त वाहनों जैसी प्रणालियों के प्रभावी संचालन के लिए विश्वसनीय सेंसर, कुशल एक्ट्यूएटर, रियल-टाइम कंप्यूटिंग, मजबूत नियंत्रण एल्गोरिदम, तेज संचार और ऊर्जा-कुशल हार्डवेयर जरूरी हैं। कारखानों और स्वायत्त वाहनों में काम करने वाले रोबोट की त्रुटियों के तत्काल भौतिक परिणाम हो सकते हैं, इसलिए ऐसी तकनीकों के विकास में सुरक्षा, विश्वसनीयता और सत्यापन को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
प्रो. करंदीकर ने कहा कि भारत सिस्टम इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण, एम्बेडेड सिस्टम, दूरसंचार और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर स्वायत्त तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने फिजिकल एआई के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय मिशन की संभावना का भी उल्लेख किया और कहा कि साइबर-भौतिक प्रणालियों पर चल रहे राष्ट्रीय मिशन का अगला चरण इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे सकता है। सत्ताइस से 29 अक्टूबर तक आयोजित ईएसटीआईसी 2026 के इस सत्र में उद्योग, शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और स्टार्ट-अप के विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास और उनके व्यावहारिक उपयोग पर विचार साझा किये।
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