लुधियाना , अगस्त 10 -- पंजाब के लुधियाना में गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में आयोजित एक सप्ताह का बकरी एवं भेड़ पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को संपन्न हो गया।

प्रशिक्षण में पंजाब के विभिन्न जिलों से 22 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया, जिनमें 19 पुरुष और तीन महिलाएं शामिल थीं।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जे.पी.एस. गिल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विस्तार शिक्षा विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान और कौशल आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से पशुपालकों को सशक्त बनाना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। उन्होंने बकरी एवं भेड़ पालन को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार, उद्यमिता और आय बढ़ाने की व्यापक संभावनाओं वाला लाभकारी व्यवसाय बताया।

विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.एस. ग्रेवाल ने कहा कि पशुपालन से जुड़े व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और लोगों की आजीविका बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ग्रामीण युवाओं के आर्थिक उत्थान में बकरी एवं भेड़ पालन को महत्वपूर्ण साधन बताया।

विभागाध्यक्ष एवं कोर्स निदेशक डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कक्षा में सैद्धांतिक जानकारी देने के साथ-साथ प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के बकरी फार्म, पशुधन उत्पाद एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा डेयरी एवं खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकी कॉलेज का दौरा करवाया गया। इन दौरों के दौरान उन्हें बकरी फार्म की दैनिक गतिविधियों के साथ-साथ मांस एवं दूध उत्पादों में मूल्यवर्धन की प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया।

प्रशिक्षण के दौरान बकरी पालन का महत्व, विभिन्न नस्लें, आवास व्यवस्था, प्रजनन तकनीक, आहार प्रबंधन, शेड निर्माण, मौसम प्रबंधन, टीकाकरण, विभिन्न बीमारियों और उनकी रोकथाम तथा बकरी पालन की अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गयी। इसके अलावा प्रतिभागियों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का विशेष दौरा भी करवाया गया, जहां उन्हें पंजाब में कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एकीकृत कृषि प्रणाली के बारे में जानकारी दी गयी।

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