वाशिंगटन , जुलाई 30 -- अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन में मंगलवार को बंद कमरे में आमने-सामने बैठक की, जिसमें ईरान के साथ युद्ध और तेहरान के प्रति अमेरिकी नीति को लेकर दोनों नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों पर चर्चा हुई। यह जानकारी इज़रायल और अमेरिका के अधिकारियों ने दी।

ब्लेयर हाउस में हुई यह बैठक ऐसे समय हुई जब पिछले कई महीनों से दोनों नेताओं के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। श्री वेंस ट्रंप प्रशासन के भीतर ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान के सबसे प्रमुख समर्थकों में रहे हैं और युद्ध को लेकर श्री नेतन्याहू सरकार के रुख की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी करते रहे हैं।

एक वरिष्ठ इज़रायली अधिकारी के अनुसार, श्री नेतन्याहू ने बैठक के दौरान श्री वेंस द्वारा हाल में इज़रायली सरकार की सार्वजनिक आलोचना और रिपब्लिकन सांसदों के बीच इज़रायल की स्थिति को लेकर जताई गई चिंताओं का मुद्दा उठाया।

अधिकारी ने कहा, "यह स्पष्ट और खुली बातचीत थी।"एक अमेरिकी अधिकारी ने भी इस बैठक को "सीधी और स्पष्ट" बातचीत बताया। हालांकि, उपराष्ट्रपति कार्यालय ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के संबंधों में लगातार तनाव बढ़ा है। श्री वेंस को ईरान के संबंध में अमेरिकी नीति तय करने वाले प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है और उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन का खुलकर समर्थन किया था। अधिकारियों के अनुसार, श्री नेतन्याहू निजी तौर पर इस समझौते के विरोधी थे, लेकिन इसके सार्वजनिक रूप से विफल होने की उम्मीद में उन्होंने खुली आलोचना से परहेज किया।

रिपोर्ट के अनुसार, श्री नेतन्याहू ने श्री वेंस की उन टिप्पणियों पर भी अपनी नाराजगी जतायी, जिनमें उन पर समझौते को कमजोर करने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति वफादार नहीं रहने के आरोप लगाये गये थे।

वहीं, श्री वेंस का कथित तौर पर मानना था कि इज़रायल में श्री नेतन्याहू के सहयोगी और अमेरिका के इज़रायल समर्थक मीडिया संस्थान उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

बैठक में दोनों नेताओं ने युद्ध संचालन को लेकर पहले हुए मतभेदों पर भी चर्चा की। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में हुई एक तनावपूर्ण टेलीफोन वार्ता के दौरान श्री वेंस ने श्री नेतन्याहू के उन आकलनों पर सवाल उठाया था, जिनमें उन्होंने दावा किया था कि ईरान में जल्द ही जनविद्रोह हो सकता है।

गत आठ अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बाद श्री वेंस ट्रंप प्रशासन में ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ता जारी रखने के सबसे मुखर समर्थकों में शामिल रहे। उनका तर्क था कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना होना चाहिए, लेकिन इसके लिए उसे लंबे सैन्य संघर्ष में नहीं उलझना चाहिए।

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