पुणे , मई 15 -- सामाजिक कार्यकर्ता और दार्शनिक उल्हास पवार ने शुक्रवार को वृक्ष संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के संबंध में संतों की शिक्षाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री पवार ने अक्षरवेल हॉल में रंगत-संगत प्रतिष्ठान द्वारा वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए डॉ. रामदास मारणे को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक विशेष सम्मान समारोह में कहा कि भाषा, पारिवारिक मूल्य और पर्यावरणीय संस्कृति वर्तमान में एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं, जिससे सामाजिक और पर्यावरणीय जागरूकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
श्री पवार ने इस बात पर जोर दिया कि वृक्ष सजीव प्राणी हैं और उनका शोषण करने के बजाय उनका पोषण किया जाना चाहिए। उन्होंने परिवारों से आग्रह किया कि वे पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा के लिए मिलकर वृक्षारोपण गतिविधियों में भाग लें। उन्होंने चेतावनी दी कि निरंतर वनों की कटाई और पर्यावरण की उपेक्षा वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण मानव अस्तित्व को खतरे में डाल सकती है।
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