भोपाल , मार्च 30 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वीआईटी विश्वविद्यालय प्रकरण में कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन और मध्यप्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर प्रकरण में आगे विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार की शिकायत पर की गई है। शिकायत में सीहोर जिले में संचालित वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय द्वारा भ्रामक प्रस्तुतीकरण, छात्रों के अधिकारों के उल्लंघन और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।

शिकायत में कहा गया कि विश्वविद्यालय द्वारा "भोपाल" नाम का उपयोग किए जाने से अन्य राज्यों के छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बनती है। साथ ही परिसर में मूलभूत सुविधाओं की कमी, व्यवस्थागत खामियां और कथित अवैध क्लीनिक संचालन जैसे मुद्दे भी उठाए गए। आयोग ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्राधिकारियों से जवाब तलब किया है।

वही एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने बताया कि पूर्व में छात्र-छात्राओं द्वारा व्यापक प्रदर्शन किया गया था, जिसमें आगजनी और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं भी सामने आई थीं। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं किए जाने के कारण उन्हें आंदोलन करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई छात्रहित और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि संबंधित संस्थाएं जवाबदेही से बचने का प्रयास करेंगी तो संगठन आंदोलन करेगा।

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