पुणे , जून 2 -- विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और विभिन्न मंदिर ट्रस्टों ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तावित मंदिर इनाम भूमि अधिकार उन्मूलन कानून का कड़ा विरोध किया है।

विहिप ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित कानून से मंदिरों की धार्मिक स्वायत्तता कमजोर होगी और राज्य भर के हजारों प्राचीन मंदिरों के साथ अन्याय होगा।

विहिप प्रतिनिधियों के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से मंदिरों को पूजा, सामुदायिक कल्याण, भोजन वितरण, धर्मशालाओं के रखरखाव और अन्य सामाजिक एवं आध्यात्मिक सेवाओं जैसी धार्मिक गतिविधियों का समर्थन करने के लिए इनाम भूमि दी गई थी।

उन्होंने कहा कि ये भूमि हिंदू समुदाय की आस्था और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण आधार हैं।

विहिप ने चिंता व्यक्त की है कि प्रस्तावित कानून से मंदिरों के वित्तीय संसाधन खतरे में पड़ सकते हैं, जिससे उनके लिए धार्मिक, धर्मार्थ और सामाजिक पहलों को जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस कानून को इसके वर्तमान स्वरूप में लागू किया गया, तो लंबे समय से चल रही मंदिर-आधारित कल्याणकारी गतिविधियां बंद हो सकती हैं।

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