नयी दिल्ली , अप्रैल 07 -- देश के बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य को लेकर विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मंगलवार को अपोलो अस्पताल की तरफ से 'हेल्थ ऑफ द नेशन 2026' रिपोर्ट में युवाओं में बढ़ते स्वास्थ्य खतरों और समय से पहले बीमारियों के संकेत मिलने पर गंभीर चिंता जताई गयी है।

जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में बीमारियों के खतरे अब कम उम्र में ही शुरू हो रहे हैं और लंबे समय तक बिना लक्षण के छिपे रहते हैं। युवाओं और कामकाजी वर्ग में गैर-संचारी रोगों का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। तीस वर्ष से कम उम्र के हर पांच में से एक व्यक्ति प्री-डायबिटिक (मधुमेह के लक्षण) पाया गया, जबकि कामकाजी वर्ग में लगभग आधे लोग प्री-डायबिटीज या डायबिटीज से प्रभावित हैं। इसके अलावा 10 में से 8 लोग का वजन अधिक हैं और हर चार में से एक उच्च रक्तचाप से ग्रस्त है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि 17 से 25 वर्ष आयु वर्ग के दो-तिहाई युवाओं में कम से कम एक स्वास्थ्य जोखिम मौजूद है, हालांकि अधिकतर मामलों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। वहीं लगभग 70 प्रतिशत लोगों में विटामिन डी और करीब आधे में विटामिन बी 12 की कमी पाई गई। 30 वर्ष से कम उम्र के दो-तिहाई युवाओं में शारीरिक फिटनेस, ताकत और संतुलन की कमी भी दर्ज की गई।

रिपोर्ट में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई गई है। एनीमिया (खून की कमी) और बढ़ता मोटापा प्रमुख समस्याएं हैं। भारत में स्तन कैंसर का औसत पता चलने की उम्र 51 वर्ष बताई गई है, जो पश्चिमी देशों की तुलना में लगभग 10 वर्ष कम है। 40 वर्ष से अधिक आयु की 359 महिलाओं में से एक में बिना लक्षण के स्तन कैंसर पाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार कई गंभीर बीमारियां सामान्य जांच से पकड़ में नहीं आतीं। फैटी लिवर के 74 प्रतिशत मामलों में लिवर एंजाइम सामान्य पाए गए, जबकि बिना लक्षण वाले 45 प्रतिशत लोगों में हृदय रोग के शुरुआती संकेत मिले। विशेषज्ञों का कहना है कि आंत (गट) स्वास्थ्य में गिरावट भी डायबिटीज और मोटापे जैसे जोखिमों से जुड़ी है।

डॉ. प्रताप सी. रेड्डी ने कहा कि अब स्वास्थ्य देखभाल को केवल इलाज तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे सक्रिय और व्यक्तिगत बनाना जरूरी है। वहीं डॉ. संगिता रेड्डी ने कहा कि समय पर जांच और लगातार निगरानी से हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नियमित इलाज और फॉलो-अप से 56 प्रतिशत उच्च रक्तचाप और 34 प्रतिशत डायबिटीज के मरीजों में सुधार देखा गया।

भारत में स्वास्थ्य जोखिम तेजी से बदल रहे हैं और अब जरूरी हो गया है कि लोग समय पर जांच कराएं, जीवनशैली में सुधार करें और बीमारी के लक्षण आने से पहले ही सतर्क रहें।

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