पटना , अक्टूबर 25 -- बिहार के ग्रामीण विकास और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि विश्व शांति स्तूप भारत-जापान की आध्यात्मिक मैत्री का प्रतीक है।विश्व शांति स्तूप के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में मंत्री श्रवण कुमार शामिल हुए। उन्होंने कहा कि विश्व शांति स्तूप भारत और जापान के बीच आध्यात्मिक मैत्री तथा विश्व शांति के साझा संकल्प का प्रतीक है। दुनिया में शांति और अहिंसा का संदेश फैलाने के उद्देश्य से जापानी बौद्ध भिक्षु पूज्य फुजी गुरुजी ने इस स्तूप की परिकल्पना की थी। उनका विश्वास था कि युद्ध का उत्तर प्रेम, घृणा का उत्तर करुणा और हिंसा का उत्तर अहिंसा है। इसी महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने राजगीर के रत्नागिरी पर्वत को चुना, जो ऐतिहासिक निर्णय था।
मंत्री ने कहा कि हमें इस धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का संकल्प लेना होगा। यह स्तूप केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि मानवता को शांति का संदेश देने वाला केंद्र है।उन्होंने कहा कि बिहार के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। सभी धर्मों से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की पहचान कर उनके सौंदर्यीकरण और विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। सड़कों, परिवहन और पर्यटन सुविधाओं के विकास से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
मंत्री ने कहा कि राजगीर में ग्लास ब्रिज, जू सफारी, घोड़ा कटोरा झील के बीच भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा और विश्व शांति स्तूप तक पहुंचने के लिए आधुनिक रोपवे जैसी सुविधाओं ने राजगीर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दी है।
समारोह में पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
मौके पर सीजीसी एंड संतोडू पिलग्रीमेज मिशन के लीडर केन्पुके होरिउची, सीनियर मोंक पूज्य निरपोनजन म्योहोजी, राजगीर बुद्ध विहार सोसाइटी की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी सहित बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु और देश-विदेश से आए श्रद्धालु मौजूद थे।
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