कुशीनगर , मार्च 29 -- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में विश्व छात्र एवं युवा संगठन और मेटा के संयुक्त तत्वावधान में भगवान बुद्ध की निर्वाणस्थली पर 'विश्व शांति संवाद ' का आयोजन किया गया, जिसमें 26 देशों के 180 विद्यार्थी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि 'वसुधैव कुटुंबकम' का भारतीय दर्शन ही वर्तमान वैश्विक समस्याओं का एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा कि आज विश्व पर्यावरण संकट, गरीबी, कुपोषण, आतंकवाद और युद्ध जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जिनका समाधान समग्र दृष्टिकोण और साझा जिम्मेदारी से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन मानव मात्र ही नहीं, बल्कि समस्त प्राणी जगत के कल्याण की बात करता है। व्यक्ति से परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व तक जुड़ाव की भावना ही इस दर्शन का मूल है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस विचार को अपने-अपने देशों में लेकर जाएं और शांति के दूत बनें।
मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तभी सार्थक है, जब वह नैतिकता और मानवीय मूल्यों से जुड़ा हो, अन्यथा विकास विनाश का कारण बन सकता है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अमरकंटक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि भगवान बुद्ध की धरती करुणा और प्रज्ञा का संदेश देती है और तकनीकी युग में भी मानवता के मूल्यों को बनाए रखना आवश्यक है। प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. अश्वनी महापात्रा ने कहा कि यह संवाद वैश्विक वैचारिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सूचना के इस युग में विवेक और आंतरिक संतुलन की आवश्यकता पहले से अधिक है।
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