मुंबई , अक्टूबर 10 -- अभिनेत्री कुब्रा सैत ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेने के महत्व पर जोर दिया।कुब्रा सैत ने कहा कि मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों को यह समझना चाहिए कि वे अकेले नहीं हैं।
अपने निजी अनुभव साझा करते हुए कुब्रा ने बताया कि जब वह चौथी कक्षा में थीं और उनकी उम्र करीब आठ-नौ वर्ष थी, तब कई बार उनका किसी से बात करने का मन नहीं करता था और वह अकेले लेटकर सोना चाहती थीं। पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि जिंदगी के अलग-अलग दौर में वह अवसाद से गुजर रही हो सकती थीं, लेकिन उस समय उन्हें इसकी समझ नहीं थी।
कुब्रा सैत ने बताया कि परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों को मानसिक परेशानियों से जूझते देखने के बाद उन्होंने इस विषय को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश की। मानसिक स्वास्थ्य पर पहले की तुलना में अधिक खुलकर चर्चा हो रही है, लेकिन उदासी, दुख, निराशा और अवसाद के बीच अंतर को समझना भी जरूरी है।
कुब्रा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि लोगों को यह भी सीखना चाहिए कि भावनात्मक परेशानियों से गुजर रहे व्यक्तियों की मदद कैसे की जाए।उन्होंने बताया कि अपने करीबियों को अवसाद और आत्महत्या के विचारों से जूझते देखने के बाद उन्होंने ऐसे लोगों की मदद करने के तरीके समझने के लिए आत्महत्या रोकथाम कार्यक्रम से संपर्क किया था।
मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत के महत्व को रेखांकित करते हुए कुब्रा ने कहा कि जितना अधिक लोग इस विषय पर बात करेंगे, उतना ही वे सहानुभूति और करुणा के महत्व को समझ सकेंगे। उन्होंने लोगों से एक-दूसरे की बात सुनने, बिना किसी पूर्वाग्रह के उनकी भावनाओं को समझने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेने की अपील की।
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