पंचकूला , मई 20 -- हरियाणा के पंचकूला में विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मधुमक्खी पालकों को प्रोत्साहन राशि वितरित की।

श्री सैनी ने कहा कि यदि मधुमक्खियां खत्म हो जायें तो मानव जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा। मधुमक्खी पालन धरती पर जीवन बचाने का एक महान प्रयास है। उन्होंने बताया कि दुनिया को इसी के प्रति जागरूक करने के लिए हर वर्ष 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है। मधुमक्खियां केवल शहद ही नहीं देतीं, बल्कि खेती, पर्यावरण और मानव जीवन के लिए भी बेहद जरूरी हैं। वेदों, पुराणों और भारतीय संस्कृति में भी मधु और मधुमक्खियों का विशेष महत्व बताया गया है।

उन्होंने कहा कि कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग, प्रदूषण, जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण मधुमक्खियों की संख्या लगातार कम हो रही है। उन्होंने किसानों से खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाने की अपील करते हुए कहा कि कम लागत और कम संसाधनों में शुरू होने वाला यह व्यवसाय लाखों लोगों को रोजगार दे सकता है। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र के रामनगर में इजरायली तकनीक पर आधारित एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र और शहद व्यापार केंद्र स्थापित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 वर्ष पहले देश में 76 हजार टन शहद का उत्पादन होता था, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किये गये नेशनल बी कीपिंग एंड हनी मिशन के बाद वर्ष 2024-25 में एक लाख टन शहद का निर्यात किया गया। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने वर्ष 2021 में मधुमक्खी पालन नीति लागू की थी। इसके तहत वर्ष 2030 तक मधुमक्खी पालकों की संख्या 7750 और शहद उत्पादन 15500 टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार की ओर से मधुमक्खी के बक्सों, कॉलोनी और उपकरणों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही मधुमक्खी पालन को मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना और भावांतर भरपाई योजना में भी शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 30 किसानों को भावांतर भरपाई योजना के तहत एक करोड़ दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की। उन्होंने बताया कि नेशनल मधु क्रांति पोर्टल पर हरियाणा के 3000 से अधिक मधुमक्खी पालक पंजीकृत हैं।

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