पटना , जून 17 -- शुओं से उत्पन्न जैव अपशिष्ट (बायो वेस्ट) के वैज्ञानिक प्रबंधन का अध्ययन करने के उद्देश्य से विश्व बैंक की दो सदस्यीय टीम ने पटना नगर निगम की ओर से संचालित रामचक बैरिया स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर तथा एनिमल क्रिमेटोरियम का दौरा किया। टीम ने यहां संचालित विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर नगर निगम के प्रयासों की सराहना की।

विश्व बैंक की टीम इन दिनों बिहार के विभिन्न स्थलों का दौरा कर पशुओं से उत्पन्न जैव अपशिष्ट के प्रबंधन की व्यवस्था का अध्ययन कर रही है। इसी क्रम में टीम ने पटना नगर निगम द्वारा संचालित सुविधाओं का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि पटना नगर निगम द्वारा प्रतिदिन शहर के विभिन्न इलाकों से लगभग 40 आवारा कुत्तों को पकड़कर एबीसी सेंटर लाया जाता है। यहां उनकी नसबंदी (बर्थ कंट्रोल सर्जरी) की जाती है। सर्जरी से पहले और बाद में पशुओं की समुचित देखभाल एवं उपचार किया जाता है तथा उन्हें कम से कम चार दिनों तक निगरानी में रखा जाता है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें उसी स्थान पर वापस छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

विश्व बैंक की टीम ने डॉग हॉस्पिटल की लैब, ऑपरेशन थियेटर तथा अन्य सुविधाओं का भी अवलोकन किया। उन्हें पशुओं की देखभाल, नसबंदी प्रक्रिया, उपचार व्यवस्था तथा अस्पताल की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया गया। टीम ने पशु कल्याण और जनसंख्या नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही वैज्ञानिक एवं मानवीय व्यवस्था की प्रशंसा की।

अधिकारियों ने बताया कि नसबंदी सर्जरी के दौरान उत्पन्न होने वाले जैव अपशिष्ट को सुरक्षित तरीके से संग्रहित कर रामचक बैरिया स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) द्वारा संचालित इन्सिनरेटर में भेजा जाता है। वहां इस अपशिष्ट का पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाता है।

विश्व बैंक की टीम ने नगर निगम द्वारा संचालित एनिमल क्रिमेटोरियम का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि यहां दो अत्याधुनिक विद्युत चालित भट्टियां स्थापित हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन औसतन 05 से 06 मृत पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से अंतिम निस्तारण किया जाता है।

टीम को बताया गया कि इस क्रिमेटोरियम में वेट स्क्रबर तकनीक का उपयोग किया जाता है। मृत पशुओं के दाह संस्कार के दौरान निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड सहित अन्य हानिकारक गैसों को वेट स्क्रबर अवशोषित कर लेता है, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होता। नगर निगम की इस सुविधा में बड़े से बड़े पशु का दाह संस्कार लगभग तीन घंटे में पूरा कर लिया जाता है और पूरी प्रक्रिया पर्यावरण के अनुकूल तरीके से संपन्न होती है।

अधिकारियों ने बताया कि दाह संस्कार के बाद प्राप्त राख को रामचक बैरिया परिसर में वैज्ञानिक पद्धति से मिट्टी में दबाया जाता है। इस राख में कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे खनिज तत्व मौजूद होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होते हैं।

दौरे के दौरान विश्व बैंक प्रतिनिधिमंडल ने रामचक बैरिया स्थित ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण की भी जानकारी ली। उन्हें बताया कि यहां प्रतिदिन लगभग 1200 टन ठोस कचरा पहुंचता है। इसके बावजूद परिसर में दुर्गंध नहीं होने पर टीम ने विशेष संतोष व्यक्त किया।

टीम को बैरिया में चल रहे लीगेसी वेस्ट ट्रीटमेंट, बायो-रिमेडिएशन, बायोमेथनेशन, कम्पोस्टिंग तथा मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) जैसी परियोजनाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से पुराने कचरे के निष्पादन और संसाधनों के पुनः उपयोग की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।

दौरे के अंत में विश्व बैंक टीम ने विजिटर्स बुक में अपने विचार दर्ज किए। विश्व बैंक की प्रतिनिधि जॉली ब्रूड ने लिखा, "हमने परिसर का दौरा किया और एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर की कार्यप्रणाली, प्रयोगशाला में मौजूद सुविधाओं, अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था तथा इन्सिनरेटर संचालन को देखकर अत्यंत प्रभावित हुए। हम आशा करते हैं कि यह संस्थान भविष्य में भी इसी प्रकार उच्च मानकों को बनाए रखेगा।"विश्व बैंक टीम ने पशु कल्याण, जैव अपशिष्ट प्रबंधन तथा ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के क्षेत्र में पटना नगर निगम द्वारा किए जा रहे कार्यों को अनुकरणीय बताते हुए उनकी सराहना की।

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