जालंधर , मई 16 -- विश्व दूरसंचार और सूचना समाज दिवस के अवसर पर शनिवार को यहां "संचार का विकास" विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया।

पुष्पा गुजराल साइंस सिटी में आयोजित कार्यक्रम में पंजाब के विभिन्न हिस्सों से 150 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। इस वर्ष की थीम "डिजिटल लाइफलाइन : कनेक्टेड दुनिया में मजबूती को सशक्त बनाना" रही, जिसका उद्देश्य आपातकालीन और कठिन परिस्थितियों में मजबूत एवं विश्वसनीय संचार नेटवर्क की आवश्यकता को रेखांकित करना था।

इस अवसर पर साइंस सिटी के निदेशक डॉ. राजेश ग्रोवर ने कहा कि विश्व दूरसंचार दिवस सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) की सामाजिक विकास में भूमिका और डिजिटल विभाजन को कम करने के प्रति जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज की जुड़ी हुई दुनिया में डिजिटल उपकरण लोगों को संपर्क में रहने, सूचित रहने और चुनौतियों के लिए तैयार रहने में मदद करते हैं।

डॉ. ग्रोवर ने कहा कि तकनीक का समझदारी से उपयोग करना समुदायों को अधिक मजबूत और चुनौतियों के प्रति तैयार बनाता है। ऑनलाइन शिक्षा से लेकर आपातकालीन अलर्ट तक, डिजिटल लाइफलाइन लोगों को सुरक्षित और सहयोग प्राप्त करने में मदद करती है। उन्होंने मोबाइल संचार नेटवर्क के तेजी से विकास तथा आज की डिजिटल दुनिया में तेज डेटा ट्रांसफर और सुरक्षित संचार प्रणालियों की बढ़ती आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जालंधर के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन विभाग के डॉ. रोहित सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने पारंपरिक लैंडलाइन फोन से लेकर आधुनिक वायरलेस और इंटरनेट आधारित प्रणालियों तक संचार तकनीक की यात्रा को विस्तार से समझाया। उन्होंने आपातकालीन स्थितियों और व्यवधानों के दौरान मजबूत डिजिटल अवसंरचना की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. रोहित सिंह ने एनालॉग सिस्टम से आधुनिक 5जी और फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क तक संचार तकनीकों के विकास पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि डिजिटल संचार उपकरण और इंटरनेट आधारित एप्लिकेशन आज व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक बन चुके हैं, विशेषकर संकट की परिस्थितियों में।

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