उदयपुर , सितम्बर 05 -- राजस्थान में उदयपुर में विश्व गिद्ध दिवस के अवसर पर शनिवार को राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में गिद्ध संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के उपनिदेशक डॉ द्वारका प्रसाद गुप्ता ने की। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष सितंबर के प्रथम शनिवार को विश्व गिद्ध दिवस मनाया जाता है। डॉ. गुप्ता ने गिद्धों के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गिद्ध प्रकृति के महत्वपुर्ण सफाईकर्मी हैं,जो मृत पशुओं के अवशेषों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने और संक्रमण एवं बीमारियों के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन्यजीव चिकित्सक बायोलॉजिकल पार्क, सज्जनगढ़ डॉ. हिमांशु व्यास ने गिद्धोे की विशेषताओं, उनकी उड़ान क्षमता एवं भोजन तलाशने की अद्भुत क्षमता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया की गिद्ध काफी ऊंचाई पर उड़ान भरने और अपनी तीक्ष्ण दृष्टि एवं गंध पहचानने की क्षमता के माध्यम से दूर-दूर तक भोजन की तलाश करने के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बताया की भारत में गिद्धों की नौ प्रजातियां पायी जाती हैं।

इस अवसर पर संस्थान की वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ पदमा मील ने गिद्धों की पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी।

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