नई दिल्ली , मार्च 5 -- विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि दुनिया इस समय जिस तरह के "उथल-पुथल भरे दौर" से गुजर रही है उसमें लोगों को वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति अधिक जागरूक रहने की आवश्यकता है।

विदेश मंत्री ने आगाह किया कि यह उथल-पुथल तथा अस्थिरता इस समय इतनी बढ़ गई है कि यह अंतरराष्ट्रीय मंचों में भागीदारी को भी प्रभावित कर सकती है। वह राजधानी में प्रतिष्ठित रायसीना डायलग-2026 में एक सत्र को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा, बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ नागरिकों के लिए वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति अधिक जागरूक रहने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।"श्री जयशंकर ने कहा, "हम उथल-पुथल भरे समय में हैं, यह बात पहले से ही स्पष्ट थी। लेकिन यह उथल-पुथल इतना तीव्र हो सकता है कि इससे यहां (इस वैश्विक राजनयिक संवाद कार्यक्रम में) की भागीदारी भी प्रभावित हो जाए, यह (अपने आप में) बहुत कुछ कहता है।" इस कार्यक्रम में इस बार फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जंडर स्टब विशिष्ट मेहमान वक्ता थे। विदेश मंत्री ने इसमें भागीदारी के लिए उनका धन्यवाद भी किया।

उन्होंने कहा, "हमने अभी-अभी वैश्विक स्थिति पर उनका विचारपूर्ण और आशावादी विश्लेषण सुना है, वह भी ऐसे समय में जब परिस्थितियाँ काफी जटिल हैं। इससे आगे की चर्चाओं का स्वर तय हो गया है।"श्री जयशंयर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस आह्वान को भी दोहराया कि भारत को दुनिया के साथ गहराई से जुड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा, "पिछले एक वर्ष की घटनाएँ और इस समय चल रहे घटना क्रम ने यह साबित किया है कि भारत के लोगों को वैश्विक परिदृश्य की गहरी समझ विकसित करनी चाहिए और दुनिया को भी भारत के बारे में उतनी ही प्रासंगिक समझ बनानी चाहिए। हमें दोनों (एक दूसरे के प्रति समझ) को लगातार अद्यतन करते रहना होगा।"फिनलैंड के राष्ट्रपति श्री स्टब ने वैश्विक स्तर पर भारत की सक्रिय भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, "यूरोप ने भारत से यह सबक सीखा है कि निष्क्रियता कोई रणनीति नहीं है। औपचारिक गठबंधन का हिस्सा न होते हुए भी भारत खुद को अलग-थलग नहीं करता। इसके विपरीत, आपकी (भारत की) ताकत सक्रिय भागीदारी पर आधारित है।"श्री स्टब ने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी "केवल एक बड़ा समझौता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक विकल्प है।" उन्होंने कहा कि यह साझेदारी दोनों पक्षों के रिश्तों में नए युग की शुरुआत करेगी। मेहमान राष्ट्रपति ने कहा, "हम मिलकर ऐसी साझेदारी बना रहे हैं जो दुनिया के लिए एक उदाहरण बन सकती है।"अपने संबोधन विदेश मंत्री जयशंकर के एक पहले के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए श्री स्टब ने कहा, "मेरे पसंदीदा विदेश मंत्रियों में से एक डॉ. जयशंकर ने कहा है कि यूरोप को इस सोच से बाहर आना होगा कि यूरोप की समस्याएँ ही दुनिया की समस्याएँ हैं, लेकिन दुनिया की समस्याएँ यूरोप की समस्या नहीं हैं। मैं इससे पूरी तरह सहमत हूँ। यूक्रेन, मध्य पूर्व, सूडान और अन्य कई संघर्ष - ये सभी हमारी सामूहिक समस्याएँ हैं, जिन्हें हमें मिलकर हल करना होगा।"इस संवाद में बहुपक्षीय सहयोग के महत्व और बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच देशों के सक्रिय बने रहने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने राष्ट्रपति श्री स्टब के साथ मिलकर 5 से 7 मार्च तक आयोजित ' रायसीना डायलॉग- 2026' का उद्घाटन किया। यह भारत द्वारा द्वारा वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति पर केंद्रित संवाद कार्यक्रम का 11वां संस्करण है।

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