अजमेर , अगस्त 01 -- राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ किसनराव बागडे ने कहा है कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें चरित्र निर्माण, नैतिक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और प्रतिभा विकास के राष्ट्रीय केन्द्र के रूप में विकसित होना होगा।
श्री बागडे शनिवार को यहां महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के 39वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, नकल-मुक्त परीक्षा प्रणाली, मूल्य आधारित शिक्षा तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में विश्वविद्यालयों की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में नैतिकता, ईमानदारी और चरित्र निर्माण को पुनः स्थापित करना आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने मूल्य आधारित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया है, जिसे विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ नैतिक चेतना का भी विकास करें ताकि देश को सक्षम, ईमानदार और उत्तरदायी नागरिक मिल सकें।
उन्होंने नकल-मुक्त परीक्षा प्रणाली को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला बताते हुए कहा कि प्रतिभा का वास्तविक मूल्यांकन ईमानदार परीक्षा व्यवस्था से ही संभव है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से नशामुक्त भारत अभियान से जुड़ने, सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा जब शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और प्रतिभा विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जायेगा।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को परीक्षा केन्द्रों की परंपरागत भूमिका से आगे बढ़कर अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप, उद्यमिता और भारतीय ज्ञान परम्परा के उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में विकसित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो रोजगार सृजित करें, समाज की समस्याओं का समाधान खोजें और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत का नेतृत्व करें।
उन्होंने विश्वविद्यालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और आधुनिक विज्ञान का समन्वय ही भविष्य की शिक्षा का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में विश्वविद्यालयों की भूमिका निर्णायक होगी और प्रत्येक विद्यार्थी को "राष्ट्र प्रथम" की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
जल संसाधन मंत्री एवं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र सुरेश सिंह रावत ने विश्वविद्यालय से अजमेर एवं पुष्कर की सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विरासत पर गहन शोध को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत का केन्द्र है, जिस पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध किए जाने चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय में संकाय सदस्यों की कमी दूर करने की आवश्यकता भी रेखांकित की तथा विधायक निधि से विश्वविद्यालय एल्यूमिनी एसोसिएशन भवन एवं विश्वविद्यालय स्वागत कक्ष भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये उपलब्ध कराने की घोषणा की।
कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने विश्वविद्यालय की भावी कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए कहा कि संस्थान को अनुसंधान एवं नवाचार का राष्ट्रीय केन्द्र, भारतीय ज्ञान परम्परा का अग्रणी अध्ययन संस्थान, उद्योग-शिक्षा साझेदारी का प्रभावी मॉडल तथा उद्यमिता एवं स्टार्टअप संस्कृति का प्रमुख केन्द्र बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
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