वाराणसी , जनवरी 24 -- माघ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से पूर्णिमा तक नौ दिनों तक काशी विश्वनाथ धाम में बाबा श्री काशी विश्वनाथ रामकथा सुनेंगे।
शनिवार को अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर अरुण दास, आचार्य सूर्यालाल शास्त्री, महंत देवेशाचार्य हनुमान गढ़ी और देवेंद्र पाठक ने मां श्रृंगार गौरी का विधि-विधान से मंत्रोच्चार के साथ पूजन कर कथा का शुभारंभ किया।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि 19 अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने मंदिर तोड़ा था। इसके कुछ ही दिनों बाद ब्राह्मणों ने मां श्रृंगार गौरी मंदिर के अवशेषों को सुरक्षित रखकर श्री काशी विश्वनाथ जी को रामकथा सुनाने की परंपरा शुरू की थी। यह परंपरा 1965 तक बिना किसी लिखित प्रमाण के चली आ रही थी।
वर्ष 1965 में नगर निगम के गठन के बाद तत्कालीन उप-जिलाधिकारी के आदेश से कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात रामकथा का औपचारिक प्रारंभ हुआ। तभी से माघ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से पूर्णिमा तक नौ दिनों तक बाबा विश्वनाथ रामकथा सुनते हैं। उसके बाद से आज तक काशी के वैदिक विद्वान और ब्राह्मण भगवान शिव को रामकथा सुनाते आ रहे हैं।
यह नौ दिवसीय कथा है, जिसमें पहले दिन और समापन के दिन श्रृंगार गौरी का पूजन होता है। उन्होंने बताया कि बाबा से प्रार्थना की गई है कि ज्ञानवापी में भव्य विश्वेश्वर महादेव का मंदिर बने।
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