नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- बजट 2026-27 की घोषणा के अनुरूप विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में निर्मित वस्तुओं की घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र (डीटीए) में बिक्री पर सीमा शुल्क में रियायतों को कुछ शर्तों के साथ अधिसूचित किया गया है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवधानों से प्रभावित विनिर्माण इकाइयों की क्षमता उपयोग को बेहतर बनाने के लिए इस बार के बजट में यह छूट देने के प्रावधान किए गए हैं।

मंत्रालय ने कहा कि इस उपाय से लगभग 1,200 एसईजेड विनिर्माण इकाइयों को लाभ होने की उम्मीद है। इससे बडड़े पैमाने का उत्पादन हो सकेगा, लागत कम होगी और विनिर्माण क्षेत्र में मजबूती बढ़ेगी, साथ ही एसईजेड की निर्यात-उन्मुख प्रकृति भी बनी रहेगी।

विज्ञप्ति के अनुसार, तीन रियायतों की पात्र एसईजेड विनिर्माण इकाइयां रियायती शुल्क दरों पर डीटीए को माल भेज सकती हैं, बशर्ते यह सीमा पिछले तीन वित्तीय वर्षों में से किसी भी वर्ष में प्राप्त उच्चतम वार्षिक फ्री ऑन बोर्ड (एफ ओ बी) निर्यात मूल्य के 30 प्रतिशत तक सीमित हो। दोहरे लाभ से बचने के लिए, इनपुट पर शुल्क छूट जैसे निर्यात लाभों की अनुमति नहीं है।

इस अधिसूचना में पात्रता की प्रमुख शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनमें एसईजेड में न्यूनतम 20 प्रतिशत मूल्यवर्धन शामिल है, जिसकी गणना मूल्यांकन योग्य मूल्य और इनपुट लागतों पर आधारित एक परिभाषित सूत्र का उपयोग करके की जाती है।

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