चंडीगढ़ , सितंबर 01 -- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) से गुरुग्राम और नूंह राजस्व मंडलों में निजी पक्ष को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने संबंधी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद सभी हितधारकों को विस्तृत लिखित सुझाव देने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की है। एआईपीईएफ के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने मंगलवार को एचईआरसी को पत्र लिखकर कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विशेषज्ञ समिति ने अपनी डेलीबेरशंस पूरी कर आयोग को रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट की विषय-वस्तु चाहे जो भी हो, वह केवल सिफारिशी प्रकृति की हो सकती है और आयोग द्वारा की जाने वाली स्वतंत्र वैधानिक एवं अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि समिति को समानांतर वितरण लाइसेंस के प्रस्ताव से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों की जांच का दायित्व सौंपा गया था। इनमें वैधानिक पात्रता, वित्तीय एवं तकनीकी क्षमता, मौजूदा वितरण व्यवस्था पर प्रभाव, उपभोक्ताओं का स्थानांतरण, टैरिफ एवं क्रॉस-सब्सिडी, सार्वभौमिक सेवा दायित्व, ट्रांसमिशन एवं ग्रिड एकीकरण, उपभोक्ता संरक्षण और व्यापक जनहित जैसे विषय शामिल हैं।
एआईपीईएफ ने मांग की कि एचईआरसी को याचिका संख्या 30/2026 पर निर्णय लेने से पहले एआईपीईएफ सहित सभी संबंधित हितधारकों को विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर अपनी बात रखने का पूरा अवसर देना चाहिए। साथ ही आयोग रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रभावित पक्षों को रिपोर्ट का अध्ययन करने और उस पर जवाब देने के लिए पर्याप्त एवं सार्थक समय उपलब्ध कराये। एआईपीईएफ के मीडिया सलाहकार वी. के. गुप्ता ने कहा कि हरियाणा के बिजली मंत्री विधानसभा में स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार गुरुग्राम और नूंह में समानांतर लाइसेंस के पक्ष में नहीं है और बिजली वितरण के निजीकरण के किसी भी कदम का विरोध करेगी।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समानांतर वितरण लाइसेंस का प्रभाव केवल आवेदक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौजूदा उपभोक्ताओं, वर्तमान वितरण लाइसेंसधारी, सार्वजनिक संपत्तियों, बिजली कर्मचारियों और हरियाणा की संपूर्ण बिजली वितरण व्यवस्था पर भी पड़ेगा।
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