जयपुर , अगस्त 13 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (चौदह अगस्त) पर वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लोगों तथा उस कठिन दौर में पीड़ा और विस्थापन झेलने वाले परिवारों को स्मरण करते हुए कहा है कि भारत का विभाजन इतिहास का अत्यंत पीडादायक अध्याय है।
इस अवसर पर श्री देवनानी ने कहा कि विभाजन के कारण लाखों लोगों को अपना घर, परिवार और अपनी जन्मभूमि छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। असंख्य लोगों ने हिंसा और बिछोह की पीड़ा सहन की। उन्होंने कहा कि यह दिवस हमें उस दौर की पीड़ा को स्मरण करने के साथ-साथ देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा "विभाजन की त्रासदी से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि नफरत, हिंसा और वैमनस्य किसी भी समाज और राष्ट्र के लिए हितकारी नहीं हो सकते। भारत की शक्ति उसकी विविधता में एकता, आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत में निहित है। राजस्थान ने विभाजन के समय विस्थापित होकर आए लोगों को अपनाया और उन्हें नये जीवन की शुरुआत करने में सहयोग दिया। यह हमारी उस महान संस्कृति का परिचायक है, जिसमें मानवता, सह-अस्तित्व और 'वसुधैव कुटुम्बकम् का भाव सर्वोपरि रहा है।"श्री देवनानी ने कहा कि भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य अतीत की पीड़ा को स्मरण कर समाज में वैमनस्य उत्पन्न करना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेकर भविष्य को अधिक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और एकजुट बनाना है। उन्होंने कहा कि हमें आने वाली पीढ़ियों को विभाजन की त्रासदी के कारणों और उसके परिणामों से अवगत कराते हुए उनमें देश की एकता, अखंडता, लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी सम्मान के प्रति प्रतिबद्धता विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे विभाजन की पीड़ा को स्मरण करते हुए सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। हम सभी मिलकर ऐसा भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़े, जहां विविधताओं के बीच एकता कायम रहे और आने वाली पीढ़ियों को एक सशक्त, शांतिपूर्ण, समरस एवं एकजुट राष्ट्र मिले।
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