जयपुर , जुलाई 31 -- भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान केवल बोलने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे की बात धैर्यपूर्वक सुनने से निकलता है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने राजस्थान में जयपुर के होटल द ललित में शुक्रवार को आयोजित तीन दिवसीय 'राष्ट्रमंडल शांति मध्यस्थता और विधि का शासन' (सीपीएमसी-2026) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि चाहे मामला दो पड़ोसियों के बीच का हो या दो देशों के बीच का, संवाद और मध्यस्थता ही विवाद के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि किसी एक पक्ष में संवाद की इच्छा ही नहीं हो, तो सबसे अच्छे प्रयास भी सफल नहीं हो पाते।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि शांति और कानून को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। कानून की सबसे बड़ी उपलब्धि स्थायी शांति स्थापित करना है। मध्यस्थता ऐसा मंच है, जहां प्रत्येक पक्ष को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलता है और किसी एक की आवाज दूसरे पर हावी नहीं होती।
कार्यक्रम में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष स्टीवन थिरु और उच्चतम न्यायालय बार संघ के अध्यक्ष विकास सिंह सहित देश-विदेश के कई न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ और नीति निर्माता मौजूद रहे। सम्मेलन में 52 कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत की प्राचीन ग्राम पंचायत व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों से समाज में विवादों का समाधान आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से होता आया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम भी है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारतीय परंपरा हमेशा टकराव से पहले संवाद की रही है। उन्होंने रामायण और महाभारत के उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम ने युद्ध से पहले अंगद को शांति दूत बनाकर भेजा था और भगवान श्रीकृष्ण ने भी महाभारत युद्ध से पहले समझौते का प्रयास किया था।
राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के निस्तारण में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। वहीं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम आत्री ने कहा कि मध्यस्थता से वर्षों तक चलने वाले मुकदमों का समाधान कुछ महीनों में संभव हो जाता है, जिससे समय, धन और आपसी संबंधों की भी रक्षा होती है।
उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणेश्वर गुप्ता की पुस्तक का भी विमोचन किया गया। सम्मेलन का समापन दो अगस्त को जयपुर शांति मध्यस्थता घोषणा-पत्र को अपनाने के साथ होगा।
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