नयी दिल्ली , मार्च 10 -- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के निदेशक और सदस्यों ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक "समाज की खोज: भारत और उससे आगे" के एक विवादित अध्याय को लेकर मंगलवार को बिना शर्त और बिना किसी योग्यता के सार्वजनिक माफी मांगी है।

विवाद पुस्तक के अध्याय-4 "हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका " को लेकर हुआ, जिसमें न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े संदर्भों का उल्लेख किया गया था। एनसीईआरटी ने कहा है कि यह पूरी पुस्तक अब वापस ले ली गई है और फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

एनसीईआरटी की ओर से जारी बयान में कहा गया, "असुविधा के लिए हमें गहरा खेद है और हम सभी हितधारकों की समझदारी की सराहना करते हैं। एनसीईआरटी शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।"बताया जा रहा है कि अध्याय में न्यायपालिका में लंबित मामलों और न्यायिक प्रणाली की चुनौतियों से जुड़ी बातें भी शामिल थीं, जिसके बाद इसकी भाषा और प्रस्तुति को लेकर चिंता जताई गई।

इस मामले में पहले ही उच्चतम न्यायालय ने इस पाठ्यपुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत , न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने पुस्तक की सभी भौतिक तथा डिजिटल प्रतियों को जब्त करने का आदेश दिया था। साथ ही अदालत ने एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूल शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह भी पूछा था कि विवादित अध्याय के साथ पुस्तक प्रकाशित करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

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