पटना , जुलाई 04 -- िहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने विलुप्ति की ओर बढ़ रही देशी प्रजातियों की मछलियों के संरक्षण और संवर्द्धन के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना शुरू की है। विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत देशी मछलियों के पालन के इच्छुक लोगों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक मछली पालक 31 अगस्त तक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
इस योजना के तहत मछली पालक देशी मूल की माइनर कार्प, कैट फिश, वायु-श्वासी मछली, झींगा पालन तथा मोती पालन कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे देशी मछलियों का संरक्षण एवं संवर्द्धन होने के साथ-साथ मछली उत्पादकता और किसानों की वार्षिक आय में वृद्धि होगी। साथ ही, इससे बिहार की सुदूर ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। योजना के तहत सभी वर्गों के लाभुकों को निर्धारित इकाई लागत का 60 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा।
वर्ष 2026-27 में मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना राज्य के सभी जिलों के लिए लागू है। योजना के तहत निजी क्षेत्र में पालन मत्स्यिकी अवयव को निजी या सरकारी तालाब (पट्टाधारी द्वारा) में क्रियान्वित किया जा सकेगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की जलसंपदाओं में मौजूद देशी प्रजातियों की संभावनाओं वाले माइनर कार्प एवं कैट फिश के लिए विकसित हैचरी तकनीक (विगत वर्षों में कार्यान्वित योजना के तहत 12 हैचरी स्थापित की गई हैं) से उत्पादित बीज के माध्यम से पालन को बढ़ावा देना है।
मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के चार घटक हैं। इनमें माइनर कार्प पालन मत्स्यिकी योजना, कैट फिश एवं अन्य मछलियों की पालन मत्स्यिकी योजना, झींगा पालन तथा मोती पालन योजना शामिल हैं। मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के लिए लाभुकों से ऑनलाइन आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। एक व्यक्ति या परिवार को पालन मत्स्यिकी के किसी एक ही अवयव पर सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही, पालन मत्स्यिकी में एक व्यक्ति या परिवार को किसी एक अवयव के लिए अधिकतम 1 एकड़ (2 इकाई) तथा न्यूनतम 0.25 एकड़ जलक्षेत्र की अनुमान्यता होगी।
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